राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा खुलासा! 2020 में ही मिली थी चेतावनी, सुझावों पर अमल न होने से बढ़े सवाल

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अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी को लेकर जारी विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को वर्ष 2020 में ही एक निजी ऑडिट फर्म ने वित्तीय प्रबंधन और दान व्यवस्था से जुड़े संभावित जोखिमों के प्रति आगाह किया था। फर्म ने स्पष्ट रूप से मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने, निगरानी तंत्र मजबूत करने और जवाबदेही तय करने की सिफारिश की थी, लेकिन इन सुझावों पर प्रभावी अमल नहीं होने के कारण अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उस समय दान प्रबंधन, नकदी लेन-देन और बहुमूल्य चढ़ावे की निगरानी के लिए व्यवस्थित प्रक्रियाएं लागू कर दी जातीं, तो पारदर्शिता बढ़ती और कथित अनियमितताओं की आशंका काफी हद तक कम हो सकती थी।

ट्रस्ट गठन के कुछ महीने बाद ही दी गई थी सलाह

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद 5 फरवरी 2020 को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था। इसके करीब नौ महीने बाद नवंबर 2020 में एक निजी ऑडिट फर्म ने ट्रस्ट की वित्तीय और डेटा प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन कर विस्तृत आंतरिक ऑडिट एवं जोखिम प्रबंधन संबंधी सुझाव दिए थे।

रिपोर्ट में कई प्रशासनिक और वित्तीय कमियों की ओर संकेत किया गया था। ऑडिट फर्म ने कहा था कि दान से जुड़े रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से संधारित नहीं किए जा रहे हैं और वित्तीय लेन-देन की निगरानी के लिए पर्याप्त नियंत्रण तंत्र मौजूद नहीं है। रिपोर्ट में जवाबदेही आधारित प्रणाली विकसित करने और प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारियां स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई गई थी।

नकदी और बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन पर जताई थी चिंता

ऑडिट रिपोर्ट में दान के रूप में प्राप्त नकदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की गई थी। फर्म ने सुझाव दिया था कि सभी प्राप्त वस्तुओं का विस्तृत स्टॉक रजिस्टर तैयार किया जाए और उनके रखरखाव व लेखांकन के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।

इसके साथ ही बैंक खातों के नियमित मिलान, लेखांकन डेटा की समयबद्ध प्रविष्टि और प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) को मजबूत करने की भी सिफारिश की गई थी। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि डेटा प्रबंधन में कमी और गैर-व्यवस्थित प्रक्रियाएं भविष्य में विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती हैं।

1500 कर्मचारियों के बावजूद एचआर सिस्टम पर उठे थे सवाल

ऑडिट फर्म ने ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी कई सुझाव दिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत होने के बावजूद मानव संसाधन प्रबंधन की समुचित व्यवस्था विकसित नहीं की गई थी।

फर्म ने प्रशिक्षित और योग्य कर्मियों की नियुक्ति, प्रशासनिक प्रक्रियाओं के मानकीकरण तथा तकनीकी सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। जानकारों का कहना है कि यदि इन सिफारिशों को समय रहते लागू किया गया होता तो दान और संपत्तियों का प्रबंधन अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी हो सकता था।

4,500 करोड़ रुपये से अधिक दान मिलने का दावा

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ट्रस्ट के गठन के बाद नवंबर 2025 तक मंदिर को 4,575 करोड़ रुपये से अधिक नकद दान प्राप्त होने का दावा किया गया है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और न ही एसओपी से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की गई है।

यही कारण है कि वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

विहिप ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने भी सख्त रुख अपनाया है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि मामले को केवल आंतरिक जांच तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। यदि प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं तो एफआईआर दर्ज कर नियमित पुलिस जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके।

धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला, सबकी नजर जांच पर

राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और ट्रस्ट प्रशासन इन आरोपों तथा उठे सवालों पर क्या कदम उठाता है।

 

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