नाम की सीएचसी, सुविधाएं पीएचसी जैसी भी नहीं
पीएचसी को सीएचसी बने हो गए छह

साल, सेवाएं बदहाल
शीबू रहमान
सामयिक सहारा
उन्नाव। औरास क्षेत्र की 1.92 लाख आबादी की बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए छह साल पहले पीएचसी को सीएचसी का दर्जा तो दे दिया गया लेकिन संसाधन और स्टाफ की कमी से क्षेत्र के लोगों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। गर्भवतियों को प्रसव की सुविधा तो दूर मरीजों के एक्सरे और अल्ट्रासाउंड तक नहीं हो पा रहे। मरीज निजी पैथोलॉजी में जांच कराने को मजबूर हैं। औरास क्षेत्र के लोगों के लिए वर्ष 2019 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्च प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी का दर्जा दिया गया था। लोगों ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मींदें संजोईं थीं। सीएचसी बने छह साल बीत गए लेकिन आज तक ओपीडी में डॉक्टरों के देखने और दवाएं उपलब्ध कराने के साथ अन्य कोई भी सुविधा नहीं है। कई मर्तबा भेजे गए प्रस्ताव के बावजूद शासन से बजट के अभाव में यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव और माकूल स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। हादसे अथवा मारपीट की घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए मरीजों को जिला मुख्यालय रेफर कर दिया जाता है। पीएचसी के भवन में ही सीएचसी चल रहा है। मरीज भी 40 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल या लखनऊ जाने को मजबूर हैं। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार ने सीएचसी के लिए नए भवन का निर्माण कराया था। स्टॉफ न मिलने से पीएचसी के डॉक्टरों को सीएचसी भवन में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं, पीएचसी का भवन देखरेख के अभाव में जर्जर सा हो गया। सीएचसी पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार करने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सुविधाएं न होने के कारण मजबूरी में मरीजों को रेफर करना पड़ता है। अगर यहां पर्याप्त उपकरण और स्टॉफ मिल जाए तो मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से सटे होने के बाद भी सीएचसी पर समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए दुर्घटना व अन्य मरीजों को जिला अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
सीएचसी में स्टॉफ व उपकरण का मानक
एमबीबीएस डॉक्टर दो, एक महिला रोग विशेषज्ञ, एक निश्चेतक, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, एक एनेस्थीसिया, दो वार्ड बॉय, दो स्वीपर, एक डेंटल सर्जन, एक ओटी टेक्नीशियन, कनिष्ठ सहायक, वरिष्ठ सहायक, फैमिली प्लानिंग परामर्शदाता, एक एएनएम की तैनाती जरूरी। सीबीसी मशीन, एक्सरे मशीन, सेलेक्ट्रा मशीन, अल्ट्रासाउंड, एचआईवी जांच के लिए किट, मलेरिया जांच, डेंगू आदि जांच की सुविधाएं जरूरी हैं।
मौजूदा स्टॉफ
डॉ. अनूप तिवारी, डॉ. सुमित, डॉ. शोएब व महिला डॉक्टर चंद्रा कुमारी सहित स्टाफ में 25 लोग हैं। पीएचसी के मानक के अनुसार, 30 हजार की आबादी पर दो डाक्टर होने चाहिए। वहीं, सीएचसी में एक लाख की आबादी पर सात डाक्टरों की तैनाती हो, जबकि क्षेत्र की आबादी 1. 92 लाख है।
जिम्मेदार बोले
सीएचसी प्रभारी डॉ. अनूप ने बताया कि सीएचसी में स्टाफ की तैनाती के लिए हर साल पत्राचार किया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात हैं। इन्हीं के सहारे सीएचसी का संचालन हो रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि स्टाफ की तैनाती हो और उपकरण भी उपलब्ध हो जाएं।
