रोबोटिक सर्जरी से किडनी कैंसर के इलाज में बड़ी कामयाबी, मेदांता के डॉक्टरों ने मरीज को दी नई जिंदगी
गुरुग्राम : तेज रफ्तार जिंदगी और कामकाज की व्यस्तता के बीच लोग अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा ही कुछ 48 वर्षीय राकेश के साथ भी हुआ। परिवार और काम की जिम्मेदारियों में उलझे राकेश लंबे समय तक नियमित स्वास्थ्य जांच से बचते रहे, लेकिन पत्नी और बच्चों के लगातार कहने पर जब उन्होंने मेडिकल चेकअप कराया तो रिपोर्ट ने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया। जांच में उनकी बाईं किडनी में एक छोटा ट्यूमर मिला, जो किडनी की रक्त आपूर्ति के बेहद संवेदनशील हिस्से के करीब था।
हालांकि राहत की बात यह रही कि बीमारी का पता शुरुआती चरण में ही चल गया। डॉक्टरों ने स्थिति का आकलन करने के बाद सलाह दी कि पूरी किडनी निकालने के बजाय केवल ट्यूमर हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि किडनी का स्वस्थ हिस्सा सुरक्षित रखा जा सके। इसके बाद राकेश की रोबोटिक-सहायता प्राप्त पार्शियल नेफ्रेक्टोमी की गई। सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद वह सामान्य रूप से चलने-फिरने लगे और तेजी से स्वस्थ होकर घर लौट आए।
रोबोटिक तकनीक से जटिल सर्जरी हुई आसान
चिकित्सा तकनीक में तेजी से हो रही प्रगति के चलते अब किडनी कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में भी नई संभावनाएं खुल रही हैं। गुरुग्राम स्थित मेदांता-द मेडिसिटी के विशेषज्ञ अब रोबोटिक सिस्टम की मदद से किडनी सर्जरी सहित कई जटिल ऑपरेशन कर रहे हैं। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए सर्जरी को पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और सटीक बनाया जा रहा है।
भारत में तेजी से बढ़ रहे किडनी कैंसर के मामले
किडनी कैंसर, जिसे रीनल सेल कार्सिनोमा यानी आरसीसी भी कहा जाता है, देश में तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में शामिल है। भारत में हर साल इसके करीब 16 हजार से 18 हजार नए मामले सामने आते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ट्यूमर के आकार और स्थिति के आधार पर इलाज तय किया जाता है। कुछ मामलों में पूरी किडनी निकालनी पड़ती है, जबकि कई मरीजों में केवल ट्यूमर हटाकर किडनी को सुरक्षित रखा जा सकता है।
पूरी किडनी निकालना अब हर बार जरूरी नहीं
मेदांता गुरुग्राम में यूरो-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. पुनीत अहलूवालिया के मुताबिक, किडनी में ट्यूमर का पता चलते ही ज्यादातर मरीज डर जाते हैं और उन्हें लगता है कि पूरी किडनी निकालनी पड़ेगी। लेकिन आधुनिक रोबोटिक तकनीक ने इस सोच को बदल दिया है।
उन्होंने बताया कि रोबोटिक सर्जरी डॉक्टरों को ज्यादा सटीकता और बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है, जिससे कई मामलों में केवल ट्यूमर निकालकर स्वस्थ किडनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। उनका कहना है कि किडनी की कार्यक्षमता बचाए रखना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इससे भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और डायलिसिस जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा कम हो जाता है।
कैसे काम करती है रोबोटिक सर्जरी
रोबोटिक सिस्टम में बेहद छोटे और अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जो सर्जन के हाथों की गतिविधियों को अत्यधिक सटीकता के साथ दोहराते हैं। पूरी प्रक्रिया डॉक्टर के नियंत्रण में होती है। रोबोटिक आर्म्स शरीर के जटिल और संवेदनशील हिस्सों तक आसानी से पहुंचकर ऑपरेशन को अधिक सुरक्षित बनाते हैं।
इसके साथ ही यह तकनीक सर्जरी के दौरान शरीर के अंदर का थ्री-डी और बड़ा दृश्य उपलब्ध कराती है, जिससे डॉक्टर छोटी से छोटी बारीकियों को भी साफ तौर पर देख पाते हैं और ऑपरेशन में जोखिम कम हो जाता है।
कम दर्द, तेजी से रिकवरी और छोटे निशान
विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी मरीजों के लिए कई मायनों में बेहतर साबित हो रही है। इसमें दर्द कम होता है, खून कम बहता है और शरीर पर छोटे निशान पड़ते हैं। मरीजों को अस्पताल में कम समय बिताना पड़ता है और रिकवरी भी काफी तेजी से होती है। कई मरीज ऑपरेशन के अगले ही दिन चलने-फिरने लगते हैं और कुछ हफ्तों में सामान्य जीवन में लौट आते हैं।
रिकवरी के दौरान बरतें सावधानी
डॉ. अहलूवालिया ने सर्जरी के बाद की देखभाल को भी बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि मरीजों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना चाहिए तथा धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार धीरे-धीरे शारीरिक गतिविधियां बढ़ानी चाहिए और कई हफ्तों तक भारी वजन उठाने या कठिन व्यायाम से बचना चाहिए।
इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों ने लोगों को चेतावनी दी है कि पेशाब में खून आना, पीठ या बाजू में लगातार दर्द रहना, बिना वजह वजन घटना, अत्यधिक थकान महसूस होना या बार-बार बुखार आना जैसे संकेतों को हल्के में न लें। ये लक्षण कई बार किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी या किडनी कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
