लखनऊ समेत 6 जिलों को जोड़ेगा सिक्स लेन सर्कुलर एक्सप्रेसवे, SCR की ‘राज्य राजधानी माला’ परियोजना को आज मिल सकती है मंजूरी

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। ‘राज्य राजधानी माला’ परियोजना के तहत प्रस्तावित सिक्स लेन सर्कुलर एक्सप्रेसवे को लेकर आज अहम बैठक में अंतिम मुहर लगने की संभावना है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना लखनऊ सहित बाराबंकी, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई और सीतापुर को आपस में जोड़कर पूरे क्षेत्र को एक मजबूत आर्थिक और परिवहन नेटवर्क में बदलने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

ब्राउनफील्ड मॉडल पर विकसित होगी परियोजना

यह एक्सप्रेसवे ब्राउनफील्ड मॉडल पर तैयार किया जाएगा, यानी मौजूदा सड़कों को चौड़ा और आधुनिक बनाकर उन्हें सिक्स लेन कॉरिडोर का स्वरूप दिया जाएगा। इसका उद्देश्य नए मार्ग बनाने के बजाय मौजूदा ढांचे को ही उच्च क्षमता वाले एक्सप्रेसवे में बदलना है, जिससे परियोजना को तेजी से लागू किया जा सके।

लखनऊ पर ट्रैफिक दबाव होगा कम

परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य लखनऊ और आसपास के जिलों में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना है। अभी विभिन्न जिलों से आने वाला भारी ट्रैफिक राजधानी के भीतर से होकर गुजरता है, जिससे लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद इन जिलों के बीच आवागमन के लिए वैकल्पिक और तेज कॉरिडोर उपलब्ध होगा, जिससे शहरी यातायात पर दबाव कम होगा।

औद्योगिक विकास और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना का प्रभाव केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस और आवासीय परियोजनाओं के विकास की योजना भी है। इससे निवेश बढ़ने की संभावना है और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

दो चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट

इस परियोजना को दो चरणों में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में लगभग 105 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जाएगा, जो रायबरेली, लालगंज, हैदरगढ़ और बाराबंकी को जोड़ेगा। इस चरण पर करीब 2100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

दूसरे चरण में बाराबंकी, बिसवां, सीतापुर, हरदोई और संडीला को जोड़ने वाला 195 किलोमीटर लंबा मार्ग विकसित किया जाएगा। इस हिस्से पर लगभग 3900 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है और इसे 10 वर्षों में पूरा करने की योजना है।

यातायात पैटर्न ने बढ़ाई जरूरत

अध्ययन के अनुसार इन जिलों के बीच भारी आवागमन पहले से मौजूद है। लखनऊ-बाराबंकी रूट पर प्रतिदिन लगभग 50 हजार वाहन, लखनऊ-उन्नाव और लखनऊ-संडीला रूट पर 40-40 हजार वाहन, जबकि अन्य जिलों के बीच भी हजारों वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई है। यही बढ़ता ट्रैफिक इस सर्कुलर एक्सप्रेसवे की आवश्यकता को मजबूत करता है।

 

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