नेपाल में PM बालेंद्र शाह के बयान पर बवाल, भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर फिर गरमाई राजनीति
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह अपने ही एक बयान को लेकर देश में घिर गए हैं। संसद में दिए गए उनके बयान के बाद भारत-नेपाल सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है और देश के भीतर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
संसद में क्या बोले प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह
संसद में पूछे गए सवालों के जवाब में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि नेपाल और भारत ने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक-दूसरे को कूटनीतिक नोट भेजे हैं और दोनों देश राजनयिक माध्यमों से समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हैं। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी भारत के साथ कई स्थानों पर ऐसा ही किया है।
बयान के बाद नेपाल में राजनीतिक घमासान
प्रधानमंत्री के इस बयान के सामने आते ही नेपाल में विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे भ्रामक और तथ्यहीन बताया, वहीं कई विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों ने प्रधानमंत्री के दावे को खारिज कर दिया।
नेपाल के विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि नेपाल और भारत दोनों सरकारें सीमा विवाद को बातचीत के जरिए हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच 1816 की सुगौली संधि के आधार पर सीमा निर्धारित है, हालांकि कुछ क्षेत्रों जैसे सुस्ता और लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं।
विशेषज्ञों ने पीएम के दावे को किया खारिज
नेपाल के पूर्व राजदूत नीलांबर आचार्य और दीप कुमार उपाध्याय सहित कई विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्जे का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है और सीमा विवाद केवल कुछ सीमांकन और सीमा स्तंभों से जुड़ी समस्याओं तक सीमित है।
लिपुलेख मुद्दे पर भारत का रुख
इस बीच भारत ने भी लिपुलेख दर्रे को लेकर नेपाल के दावों को सिरे से खारिज किया है। भारत का कहना है कि यह क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा है और 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। भारतीय पक्ष ने साफ किया है कि इस तरह के दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
भारत-नेपाल सीमा विवाद की पृष्ठभूमि
भारत और नेपाल के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर वर्षों से सीमा विवाद चला आ रहा है। 2020 में नेपाल द्वारा नया नक्शा जारी कर इन क्षेत्रों को अपना हिस्सा दिखाए जाने के बाद यह मुद्दा और अधिक तनावपूर्ण हो गया था। भारत ने उस कदम को एकतरफा और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया था।
