डिजिटल सुरक्षा का प्रमाण देने वाली ई-मुद्रा पर ही उठे सवाल, कमजोर सिक्योरिटी की से हड़कंप; केंद्र ने दिए जांच के आदेश
कुछ सेकेंड में पता लगाई जा सकती थीं सुरक्षा कुंजियां
रिपोर्ट्स के अनुसार, ई-मुद्रा की ओर से डिजिटल प्रमाणपत्रों के लिए बनाई गई निजी सुरक्षा कुंजियां इतनी कमजोर थीं कि उनका अनुमान कुछ ही सेकेंड में लगाया जा सकता था। विशेषज्ञों के मुताबिक, सुरक्षा कुंजियों में पर्याप्त रूप से बड़ी और बेतरतीब संख्या होनी चाहिए थी, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। बताया गया है कि एक कुंजी महज चार अंकों की थी।
इन कुंजियों की कमजोरी इसलिए गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि इनके जरिए दुनिया की किसी भी वेबसाइट के लिए फर्जी डिजिटल प्रमाणपत्र जारी किए जा सकते थे। ऐसे प्रमाणपत्रों को फोन और कंप्यूटर भी वास्तविक मान सकते थे। इससे किसी असली वेबसाइट की नकल करके लोगों को धोखा देने का खतरा पैदा हो सकता था।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस घटना को वैश्विक इंटरनेट की भरोसा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है। उनका कहना है कि डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने वाली किसी एक कंपनी की सुरक्षा में चूक उन वेबसाइटों और संगठनों को भी जोखिम में डाल सकती है, जिनका उस कंपनी से सीधा संबंध नहीं है।
क्या है ई-मुद्रा और क्या करती है कंपनी?
बेंगलुरु स्थित ई-मुद्रा मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में काम करती है। पहला, डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करना और ई-साइन सेवाएं उपलब्ध कराना। इन सेवाओं का नियमन मंत्रालय के अधीन नियंत्रक प्रमाणन प्राधिकरण (CCA) करता है।
दूसरा क्षेत्र ऐसे डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ा है, जिन पर प्रमुख इंटरनेट ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम भरोसा करते हैं। इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल वेबसाइटों, सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन संचार की सुरक्षा सुनिश्चित करने में किया जाता है।
हाल में सामने आई सुरक्षा संबंधी खामी कंपनी के इसी वैश्विक डिजिटल प्रमाणपत्र कारोबार से जुड़ी है।
कमजोर सुरक्षा कुंजियों से कैसे हो सकता है नुकसान?
भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) के अनुसार, इंटरनेट पर वेबसाइट और उपयोगकर्ता के बीच भेजी जाने वाली जानकारी की सुरक्षा में डिजिटल प्रमाणपत्र और सुरक्षा कुंजियों की अहम भूमिका होती है। प्रमाणपत्र किसी वेबसाइट की पहचान की पुष्टि करने में मदद करते हैं।
यदि कोई अनधिकृत व्यक्ति निजी सुरक्षा कुंजी हासिल कर ले या उसका अनुमान लगा ले, तो वह फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर सकता है। इसके जरिए किसी वास्तविक वेबसाइट या भुगतान सेवा की नकल करना संभव हो सकता है। ऐसी स्थिति में लोग नकली वेबसाइट को असली समझकर अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कर सकते हैं या भुगतान कर सकते हैं।
हालांकि, इस मामले में अब तक कुंजियों के गलत इस्तेमाल का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इसके बावजूद सुरक्षा विशेषज्ञों ने संभावित खतरे को गंभीर बताया है।
ई-मुद्रा ने क्या सफाई दी?
ई-मुद्रा ने अपने बयान में कहा है कि इस घटना का भारत में उसके डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DAC) और ई-हस्ताक्षर कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी के मुताबिक, उसकी प्रणालियों की सुरक्षा से समझौता नहीं हुआ, कोई डेटा चोरी नहीं हुआ और उसके भौतिक तथा डिजिटल सुरक्षा उपाय सुरक्षित हैं।
कंपनी ने यह भी कहा कि उसके वैश्विक टीएलएस कारोबार का एक छोटा हिस्सा प्रभावित हुआ है। ई-मुद्रा के अनुसार, प्रभावित कारोबार उसके कुल राजस्व का लगभग एक प्रतिशत है।
केंद्र सरकार ने बनाई जांच टीम
सुरक्षा संबंधी खामियों का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार ने कहा है कि भारत में वेबसाइटों और ऐप पर इस घटना का असर बहुत सीमित और कम समय के लिए रहा है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नियंत्रक प्रमाणन प्राधिकरण के नियमन के तहत आने वाली डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र और ई-साइन सेवाएं सुरक्षित हैं और इस घटना से प्रभावित नहीं हुई हैं।
सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रहे उन दावों को लेकर भी सावधानी बरतने की अपील की है, जिनमें घटना के प्रभाव को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। मंत्रालय ने लोगों से भ्रामक जानकारियों पर भरोसा नहीं करने को कहा है।
यूजर्स अपनी सुरक्षा के लिए क्या करें?
साइबर और आईटी विशेषज्ञ प्रवीण कौशल के मुताबिक, आम उपयोगकर्ताओं के लिए कुछ आसान कदम इस तरह की समस्याओं से बचाव में मदद कर सकते हैं।
- अपने इंटरनेट ब्राउजर, मोबाइल फोन और कंप्यूटर को नवीनतम संस्करण में अपडेट करें।
- अपडेट पूरा होने के बाद डिवाइस को रीस्टार्ट करें, ताकि सुरक्षा संबंधी बदलाव लागू हो सकें।
- ब्राउजर की सुरक्षा चेतावनी को नजरअंदाज न करें। किसी भरोसेमंद वेबसाइट पर भी चेतावनी दिखे, तो जांच किए बिना आगे न बढ़ें।
- किसी प्रमाणपत्र या सुरक्षा सेटिंग में खुद बदलाव करने की कोशिश न करें। ब्राउजर कंपनियां प्रभावित प्रमाणपत्रों को पहले ही ब्लॉक कर चुकी हैं।
- डिवाइस अपडेट करने तक सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान करते समय विशेष सावधानी बरतें।
