दिल की सेहत के लिए कौन सा तेल बेहतर? रोजाना खाना पकाते समय इन 5 विकल्पों और जरूरी बातों का रखें ध्यान

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नई दिल्ली। रोजाना खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल हमारी डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तेल से मिलने वाली वसा की मात्रा और उसका प्रकार शरीर के स्वास्थ्य पर असर डालता है। ऐसे में लंबे समय तक केवल एक ही तरह के तेल का अधिक इस्तेमाल करने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली स्वस्थ वसा को संतुलित मात्रा में आहार में शामिल करना बेहतर माना जाता है। किसी तेल के रिफाइंड होने मात्र से उसे पूरी तरह नुकसानदायक मानना सही नहीं है। तेल की गुणवत्ता, उसमें मौजूद फैटी एसिड, इस्तेमाल की मात्रा और खाना पकाने का तरीका भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दिल की सेहत के लिए आमतौर पर ऐसे वसा स्रोतों को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है, जिनमें असंतृप्त वसा की मात्रा अधिक हो। इसके साथ कुल कैलोरी और संतृप्त वसा पर भी नजर रखना जरूरी है। तेल, घी या मक्खन की मात्रा जरूरत से ज्यादा होने पर स्वस्थ विकल्प भी अतिरिक्त कैलोरी का कारण बन सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह के तेल का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना जरूरी है।

घी का इस्तेमाल करें, लेकिन मात्रा का रखें ध्यान

घी भारतीय रसोई का पारंपरिक हिस्सा है। इसमें वसा में घुलने वाले कुछ विटामिन और ब्यूटिरेट जैसे यौगिक पाए जाते हैं। हालांकि घी में संतृप्त वसा की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित रखना बेहतर है। जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी जोखिम है, उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार वसा की मात्रा तय करनी चाहिए।

सरसों का तेल भी हो सकता है विकल्प

सरसों के तेल का इस्तेमाल भारतीय भोजन में लंबे समय से होता रहा है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड भी मौजूद होता है। सामान्य खाना पकाने में सीमित मात्रा में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी खास खुशबू और स्वाद के कारण यह कई पारंपरिक व्यंजनों में पसंद किया जाता है।

ऑलिव ऑयल में मौजूद होती है असंतृप्त वसा

ऑलिव ऑयल को भी हृदय के लिए अनुकूल वसा के स्रोतों में शामिल किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है और एंटीऑक्सीडेंट यौगिक भी मौजूद होते हैं। इसका इस्तेमाल सलाद, हल्की कुकिंग और दूसरे व्यंजनों में किया जा सकता है। हालांकि इसे भी जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि सभी तेलों में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है।

तिल का तेल भी हो सकता है उपयोगी

तिल के तेल में असंतृप्त वसा के साथ कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। भारतीय और एशियाई खान-पान में इसका लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। भोजन में सीमित मात्रा में तिल के तेल का इस्तेमाल स्वाद के साथ वसा के स्रोत में विविधता ला सकता है।

मक्खन लें तो सीमित मात्रा में

मक्खन में संतृप्त वसा अधिक होती है। इसलिए इसे रोजाना बड़ी मात्रा में खाना हृदय स्वास्थ्य के लिहाज से उचित नहीं माना जाता। सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है, लेकिन रोजमर्रा के भोजन में कुल संतृप्त वसा की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

सिर्फ तेल बदलने से दिल की सेहत नहीं सुधरेगी

दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल खाना पकाने का तेल बदलना पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन पर नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और रक्तचाप तथा कोलेस्ट्रॉल की नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण है। रिफाइंड तेल को केवल इसी आधार पर पूरी तरह बंद करने के बजाय डाइट में इस्तेमाल होने वाली वसा की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर ध्यान देना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।

 

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