नशे के खिलाफ पंजाब सरकार का ‘बिग 5’ मॉडल, पुलिस कार्रवाई से लेकर स्कूल और गांवों तक 5 मोर्चों पर अभियान
चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान को पांच मोर्चों वाली रणनीति में बदल दिया है। ‘बिग 5’ मॉडल के तहत नशे की सप्लाई रोकने, युवाओं में नशे की रोकथाम, सूचना तंत्र मजबूत करने, सामुदायिक निगरानी और इलाज-पुनर्वास पर एक साथ काम किया जा रहा है।
अभियान के तहत मार्च 2025 से सितंबर 2026 तक एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स ने 61,824 एफआईआर दर्ज की हैं और 81,433 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान 3,918 किलो हेरोइन, 991 किलो अफीम, 47 टन भूक्की, 1,416 किलो गांजा और 65 लाख गोलियां व कैप्सूल बरामद किए गए। इसी अवधि में पुलिस की ओर से 79,293 जनसभाएं भी की गईं।
3,600 स्कूलों में 7.5 लाख छात्रों को नशा विरोधी पाठ्यक्रम
सरकार की रणनीति में रोकथाम को भी अहम स्थान दिया गया है। इसके तहत 3,600 स्कूलों में करीब 7.5 लाख विद्यार्थियों को 14 सप्ताह का नशा विरोधी पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है।
पहले चरण में 13 जिलों के करीब 25 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में अब तक 7 हजार शिक्षकों को जागरूक किया जा चुका है।
गांवों में 1.25 लाख सदस्यों का नेटवर्क
नशे के खिलाफ सामुदायिक निगरानी को मजबूत करने के लिए करीब 15 हजार गांवों और वार्डों में रक्षा कमेटियां बनाई गई हैं। इनसे 1.25 लाख सदस्य जुड़ चुके हैं। इनमें 50 हजार से अधिक सदस्यों को ‘नशा मुक्ति ऐप’ के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया है।
वहीं, सेफ पंजाब व्हाट्सऐप हेल्पलाइन 97791-00200 पर अब तक 51 हजार से अधिक सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इन सूचनाओं के आधार पर 25 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां किए जाने की बात सामने आई है।
इलाज और पुनर्वास पर भी सरकार का फोकस
पंजाब में फिलहाल 547 ओओएटी केंद्र, 219 नशा-मुक्ति केंद्र और 91 पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। सरकारी नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में दाखिले भी बढ़े हैं।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में इन केंद्रों में करीब 12,200 दाखिले हुए थे, जो 2025 में बढ़कर करीब 34 हजार हो गए। इस तरह एक साल में दाखिलों में 170 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
पांच मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति
पंजाब सरकार के अनुसार ‘बिग 5’ मॉडल का उद्देश्य केवल नशा तस्करी करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई करना नहीं है। इसके तहत युवाओं को नशे से दूर रखने, स्कूलों में जागरूकता बढ़ाने, गांवों में सूचना तंत्र मजबूत करने और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज व पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
