युजवेंद्र चहल ने लिया बड़ा फैसला, अब नहीं खेलेंगे प्रथम श्रेणी क्रिकेट; टेस्ट खेलने का सपना रह गया अधूरा
नई दिल्ली: भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। चहल ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए लाल गेंद वाले क्रिकेट को अलविदा कहने की जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि भारत के लिए खेलने की उनकी भूख अभी भी बरकरार है। भारतीय टीम से पिछले कुछ समय से बाहर चल रहे चहल ने वनडे और टी20 में वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी है।
लाल गेंद वाले क्रिकेट को कहा अलविदा
युजवेंद्र चहल ने अपने संदेश में कहा कि जब उन्होंने पहली बार क्रिकेट की गेंद पकड़ी थी, तब वह लाल रंग की थी और उनकी उम्र महज 10 साल थी। उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस खेल से उन्हें इतना गहरा लगाव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उनके लिए लाल गेंद वाला क्रिकेट कभी सिर्फ एक प्रारूप नहीं रहा।
चहल के मुताबिक, इसी प्रारूप ने उन्हें धैर्य रखना, मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना और लंबे समय तक मैदान पर डटे रहकर हर रन तथा विकेट के लिए संघर्ष करना सिखाया।
भारत के लिए टेस्ट खेलने का नहीं मिला मौका
लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल को भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने का कभी मौका नहीं मिला। उन्होंने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर नॉर्थम्प्टनशायर के लिए अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मुकाबला खेला। अपने प्रथम श्रेणी करियर में चहल ने 49 मैचों में 32.27 की औसत से 148 विकेट हासिल किए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 25 रन देकर 6 विकेट रहा।
हाल ही में चहल ने नॉर्थम्प्टनशायर की ओर से काउंटी क्रिकेट में हिस्सा लिया। लॉर्ड्स में मिडलसेक्स के खिलाफ अपने आखिरी मुकाबले में उन्होंने दो विकेट लिए। 2026-27 सत्र में 36 वर्षीय चहल ने काउंटी चैंपियनशिप के पांच मैचों में 21 विकेट हासिल किए। डरहम के खिलाफ उनका प्रदर्शन खास रहा, जहां उन्होंने मैच में कुल नौ विकेट लिए और पहली पारी में पांच विकेट चटकाए।
टेस्ट कैप का सपना पूरा नहीं हुआ
चहल ने अपने संदेश में कहा कि लॉर्ड्स में अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच खेलना उनके लिए भावुक पल था। उन्होंने बताया कि टेस्ट कैप हासिल करना उनका हमेशा से सपना रहा, जिसे उन्होंने कई वर्षों तक अपने दिल में संजोकर रखा। हालांकि यह सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन वह अपने क्रिकेट सफर से संतुष्ट हैं और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में मिले हर अवसर के लिए आभारी हैं।
उन्होंने कहा कि लाल गेंद वाले क्रिकेट ने उन्हें जिंदगी की कुछ सबसे खूबसूरत यादें दी हैं, जिन्हें उनसे कोई नहीं छीन सकता। हालांकि प्रथम श्रेणी क्रिकेट से उनका सफर खत्म हो गया है, लेकिन क्रिकेट को लेकर उनकी कहानी अभी बाकी है।
वनडे और टी20 में वापसी के लिए लगाएंगे पूरी ताकत
चहल ने कहा कि देश के लिए खेलने की उनकी इच्छा अभी भी पहले जैसी ही मजबूत है। उनका मानना है कि उनके अंदर अभी क्रिकेट बाकी है और वनडे तथा टी20 प्रारूप में एक और मौका हासिल करने के लिए वह पूरी मेहनत करेंगे।
उन्होंने अपने क्रिकेट सफर में साथ देने के लिए हरियाणा क्रिकेट संघ, रणबीर सिंह महिंद्रा और अनिरुद्ध सिंह चौधरी का विशेष तौर पर शुक्रिया अदा किया। चहल ने कहा कि 10 साल की उम्र में पहली बार लाल गेंद पकड़ने से लेकर लॉर्ड्स में अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मुकाबला खेलने तक का सफर उनके लिए बेहद खास रहा है।
टेस्ट टीम में नहीं बन सके रणनीति का हिस्सा
युजवेंद्र चहल भारत के लिए लाल गेंद वाले क्रिकेट में मैदान पर नहीं उतर सके और टेस्ट टीम की रणनीति का भी हिस्सा नहीं रहे। हालांकि, काउंटी क्रिकेट में उन्होंने प्रथम श्रेणी प्रारूप में अपनी गेंदबाजी का प्रभाव दिखाया। अब संन्यास के बाद वह इस प्रारूप में खेलते नजर नहीं आएंगे, जबकि उनका फोकस वनडे और टी20 क्रिकेट में भारत के लिए वापसी पर रहेगा।
