लाल सागर में हूतियों का बढ़ता दबदबा! जहाजों को सफर से पहले मांगनी पड़ रही अनुमति, ईमेल पर मिल रहा ट्रांजिट परमिट

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नई दिल्ली: लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कुछ जहाजों के लिए ईमेल आधारित परमिट व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत जहाजों को पहले हूतियों से संपर्क करना पड़ रहा है और अपनी पहचान सहित जरूरी जानकारियां देने के बाद सुरक्षित रास्ते की अनुमति मांगनी पड़ रही है। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जहाजों को इस तरह के ट्रांजिट परमिट भी जारी किए गए हैं, जिनकी वैधता कई दिनों तक रहती है।

ईमेल भेजकर मांगी जा रही सुरक्षित रास्ते की अनुमति

रिपोर्ट के अनुसार, लाल सागर में प्रवेश करने से पहले कुछ जहाज हूती विद्रोहियों को ईमेल भेजकर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें बिना किसी हमले के समुद्री रास्ते से गुजरने दिया जाएगा या नहीं। बताया गया है कि हूती इन ईमेल का जवाब करीब 24 घंटे के भीतर दे रहे हैं।

एक जहाज के कप्तान ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि उनके जहाज का इजरायल, ब्रिटेन या अमेरिका से कोई संबंध नहीं है। इसके बाद उन्होंने सुरक्षित रास्ते से गुजरने की अनुमति मांगी। इसी तरह चीन के एक कंटेनर जहाज की ओर से भी हूतियों से इजाजत मांगे जाने की बात सामने आई है।

चीनी जहाज को सात दिनों का परमिट देने का दावा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी कंटेनर जहाज को जवाब में हूतियों की ओर से सात दिनों के लिए ट्रांजिट परमिट जारी किया गया। इसके साथ ही जहाज को हूतियों के ईमेल अलर्ट सिस्टम से जुड़ने का प्रस्ताव भी दिया गया, ताकि उसे समुद्री मार्ग से संबंधित नई जानकारियां मिलती रहें।

यदि यह दावा सही साबित होता है तो इसे लाल सागर में समुद्री यातायात पर हूती विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव का गंभीर संकेत माना जा सकता है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अब व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित यात्रा के लिए किसी गैर-सरकारी सशस्त्र संगठन से अनुमति लेनी पड़ रही है।

सऊदी अरब से 51 अरब डॉलर मांगने का भी दावा

इसी बीच हूतियों और सऊदी अरब के बीच कथित बातचीत को लेकर भी बड़ा दावा सामने आया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने हूतियों के साथ संघर्ष समाप्त करने की संभावनाओं पर बातचीत की थी। इसके जवाब में हूतियों की ओर से कथित तौर पर 51 अरब डॉलर की मांग रखी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, यह रकम सऊदी अरब के सैन्य अभियानों और लंबे समय तक चली नाकेबंदी से हुए नुकसान की भरपाई के रूप में मांगी गई थी। इसके अलावा हूतियों ने कथित तौर पर सऊदी अरब से उन्हें यमन के आधिकारिक शासक के रूप में मान्यता देने की मांग भी की।

सऊदी अरब ने रिपोर्ट को बताया मनगढ़ंत

हालांकि, सऊदी अरब ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री और सार्वजनिक कूटनीति के प्रभारी राजदूत रायद क्रिमली ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपोर्ट को मनगढ़ंत बताया।

उन्होंने हूतियों पर यमन की सरकार के खिलाफ काम करने और देश को लंबे संघर्ष में धकेलने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि हूती लाल सागर में व्यापारिक जहाजों, नागरिक ठिकानों और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

लाल सागर दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। ऐसे में जहाजों को कथित तौर पर परमिट लेकर इस रास्ते से गुजरने की स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए चिंता बढ़ाने वाली है। हालांकि, ईमेल आधारित परमिट व्यवस्था और 51 अरब डॉलर की मांग से जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, सऊदी अरब ने रकम मांगने संबंधी दावे को खारिज कर दिया है।

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