22 साल तक अंतरिक्ष के रहस्य खोलता रहा नासा का स्विफ्ट टेलीस्कोप, आग का गोला बनकर धरती पर गिरा
वाशिंगटन: ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाने वाला नासा का 22 साल पुराना स्विफ्ट टेलीस्कोप बुधवार को अपना सफर पूरा कर गया। शक्तिशाली गामा-रे विस्फोटों और ब्लैक होल का अध्ययन करने वाला यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल होते ही आग के गोले में तब्दील हो गया। इसके बाद यह इंडोनेशिया के ऊपर जलकर नष्ट हो गया। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
इंडोनेशिया के ऊपर वायुमंडल में हुआ दाखिल
नासा के मुताबिक, ‘नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी’ ने भारतीय समयानुसार बुधवार शाम 6 बजकर 9 मिनट पर इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा प्रांत के ऊपर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। उस वक्त इसकी गति ध्वनि की रफ्तार से करीब 22 गुना अधिक थी। लगभग 1,452 किलोग्राम वजनी इस टेलीस्कोप का ज्यादातर हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश के दौरान पैदा हुई अत्यधिक गर्मी और घर्षण के कारण जलकर नष्ट हो गया।
दो साल के मिशन के लिए भेजा गया था टेलीस्कोप
स्विफ्ट टेलीस्कोप को शुरुआत में केवल दो साल के मिशन के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया था, लेकिन इसने करीब 22 वर्षों तक काम किया। इस दौरान इसने वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड से जुड़ी कई अहम जानकारियां दीं। इसकी मदद से शक्तिशाली गामा-रे विस्फोटों और ब्लैक होल जैसी खगोलीय घटनाओं का अध्ययन किया गया। इसके धरती पर लौटने के साथ ही अंतरिक्ष विज्ञान के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया।
टेलीस्कोप को बचाने की कोशिशें भी नाकाम
नासा ने इस टेलीस्कोप को अंतरिक्ष में बनाए रखने और इसकी कार्य अवधि बढ़ाने के लिए आखिरी समय तक प्रयास किए थे। हालांकि, इसे बचाने का अभियान सफल नहीं हो पाया। टेलीस्कोप की वापसी जीवनकाल बढ़ाने के लिए चलाए गए बचाव अभियान के नाकाम होने के तीन महीने से भी कम समय बाद हुई।
मलबे से नुकसान की आशंका बेहद कम थी
नासा ने पहले ही टेलीस्कोप के मलबे से धरती पर संभावित खतरे को बेहद कम बताया था। एजेंसी के अनुमान के मुताबिक, किसी व्यक्ति के इसके मलबे की चपेट में आकर घायल होने की आशंका 2,100 में से केवल एक थी। वैज्ञानिकों को अंदेशा था कि टेलीस्कोप के कुछ हिस्से वायुमंडल में पूरी तरह नष्ट नहीं होंगे और छोटे टुकड़ों के रूप में जमीन तक पहुंच सकते हैं।
धरती तक पहुंच सकते थे जले हुए टुकड़े
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश कंपनी एक्यू कंपोनेंट्स के एयरोस्पेस इंजीनियर डीन स्लेडन ने बताया कि टेलीस्कोप के कुछ छोटे और जले हुए टुकड़े ही धरती तक पहुंचने की आशंका थी। उन्होंने कहा कि इस आकार के उपग्रह नियमित रूप से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस आते रहते हैं। अंतरिक्ष उड़ानों के करीब 70 वर्षों के इतिहास में गिरते हुए अंतरिक्ष मलबे के कारण किसी व्यक्ति की मौत का मामला सामने नहीं आया है।
