WhatsApp की नई Strict Account Setting क्या है? जो खतरनाक साइबर अटैक से देगी मजबूत सुरक्षा

नई दिल्ली। मैसेजिंग ऐप WhatsApp लगातार यूजर्स की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए फीचर्स पेश कर रहा है। इसी कड़ी में अब कंपनी ने एक नया और बेहद अहम सिक्योरिटी फीचर लॉन्च किया है, जिसे Strict Account Setting नाम दिया गया है। इस फीचर का मकसद उन यूजर्स को अतिरिक्त सुरक्षा देना है, जो साइबर अटैक, स्पाइवेयर या टारगेटेड हैकिंग के ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
WhatsApp का कहना है कि यह नई सेटिंग आने वाले कुछ हफ्तों में सभी यूजर्स के फोन पर उपलब्ध करा दी जाएगी।
क्या है WhatsApp की Strict Account Setting
Strict Account Setting एक तरह का एडवांस्ड सिक्योरिटी मोड है, जो यूजर के अकाउंट को सबसे ज्यादा सुरक्षित और सीमित सेटिंग्स पर लॉक कर देता है। इस फीचर के एक्टिव होते ही उन लोगों से आने वाले अटैचमेंट, मीडिया फाइल और संदिग्ध कंटेंट अपने आप ब्लॉक हो जाते हैं, जो आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल नहीं हैं। इससे अनजान सोर्स से होने वाले साइबर हमलों की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है।
कंपनी के मुताबिक, यह फीचर खासतौर पर टारगेट किए गए यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
किन लोगों के लिए है यह फीचर सबसे ज्यादा जरूरी
WhatsApp ने अपने ऑफिशियल ब्लॉग पोस्ट में साफ किया है कि Strict Account Setting खासकर जर्नलिस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता, पब्लिक फिगर और ऐसे यूजर्स के लिए बनाई गई है, जिन्हें साइबर अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। आसान भाषा में कहें तो यह फीचर WhatsApp अकाउंट पर एक तरह का लॉकडाउन मोड ऑन कर देता है, जिससे ऐप की फंक्शनैलिटी सीमित हो जाती है लेकिन सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।

कैसे करें WhatsApp में Strict Account Setting ऑन
इस फीचर को ऑन करने की प्रक्रिया बेहद आसान है।
सबसे पहले WhatsApp ऐप खोलें।
इसके बाद Settings में जाएं।
अब Privacy ऑप्शन पर टैप करें।
यहां Advanced सेक्शन में जाकर Strict Account Setting को ऑन किया जा सकता है।
साइबर अटैक और स्पाइवेयर से मिलेगी मजबूत सुरक्षा
WhatsApp की यह नई सेटिंग यूजर्स की डिजिटल सेफ्टी को अगले स्तर पर ले जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर अटैक, स्पाइवेयर और संभावित सिक्योरिटी वायलेशन से यूजर्स को बचाना है। कंपनी ने यह भी बताया है कि प्लेटफॉर्म पर फोटो, वीडियो और मैसेज को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए Rust नाम की एडवांस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ऐप की सिक्योरिटी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो सके।
