किसानों के लिए वरदान बनी सोलर लाइट ट्रैप मशीन, बिना कीटनाशक फसलों से दूर होंगे हानिकारक कीट, सरकार दे रही 75% सब्सिडी

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लखीमपुर। किसानों को फसलों में लगने वाले हानिकारक कीटों से राहत दिलाने और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए कृषि विभाग ने सोलर लाइट ट्रैप योजना को प्रभावी रूप से लागू किया है। यह योजना एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के तहत संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य किसानों को सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक उपलब्ध कराना है।

पहले चरण में 1500 किसानों को मिलेगा लाभ

कृषि विभाग के अनुसार, योजना के पहले चरण में जिले के 1500 किसानों को इसका लाभ दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया पूरी तरह पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर की जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद किसानों तक यह सुविधा समय पर पहुंच सके।

सूरज की रोशनी से चार्ज, रात में करेगा कीट नियंत्रण

सोलर लाइट ट्रैप पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित आधुनिक उपकरण है। यह दिन में सूर्य की रोशनी से स्वतः चार्ज होता है और रात में प्रकाश देकर कीटों को अपनी ओर आकर्षित करता है। रोशनी की तरफ आने वाले कीट ट्रैप में लगे संग्रह चैम्बर में गिर जाते हैं, जिससे वे फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा पाते। जरूरत पड़ने पर इसे बिजली से भी चार्ज किया जा सकता है। खेतों में इसे लकड़ी या पोल के सहारे आसानी से लगाया जा सकता है, जिससे बड़े क्षेत्र में प्रभावी कीट नियंत्रण संभव हो पाता है।

कीटनाशकों पर निर्भरता होगी कम

इस तकनीक के इस्तेमाल से रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग पर रोक लगेगी। इससे न सिर्फ मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से भी बचाव होगा। साथ ही किसानों की खेती लागत घटेगी और फसलों की गुणवत्ता व उत्पादन में भी सुधार देखने को मिलेगा।

75 प्रतिशत अनुदान के साथ सिर्फ 204 रुपये में मशीन

जिला कृषि रक्षा अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि सोलर लाइट ट्रैप की निर्धारित कीमत 635 रुपये है। इस पर सरकार की ओर से 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। अनुदान की 431 रुपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से किसान के खाते में भेजी जाएगी। इस तरह किसानों को यह उपयोगी उपकरण महज 204 रुपये में उपलब्ध होगा।

हर विकास खंड में होगा वितरण

जनपद खीरी में योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कुल 1500 सोलर लाइट ट्रैप इकाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। इनका वितरण प्रत्येक विकास खंड में स्थित कृषि रक्षा इकाइयों के माध्यम से किया जाएगा। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और रसायन मुक्त, सुरक्षित व सतत कृषि की दिशा में आगे बढ़ें।

 

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