बारिश की आफत में फंसे लोग, ऊपर से चालान की मार; लखनऊ के जियामऊ पुल का वीडियो वायरल, पुलिस की संवेदनशीलता पर उठे सवाल

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लखनऊ: राजधानी लखनऊ में भारी बारिश के बीच पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जियामऊ पुल के पास बारिश से बचने के लिए रुके दुपहिया वाहन चालकों पर पुलिस द्वारा चालान किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की संवेदनशीलता और कार्यशैली को लेकर बहस शुरू हो गई है।

बारिश से बचने के लिए पुल के नीचे रुके थे दुपहिया चालक
मौसम का मिजाज बिगड़ते ही लखनऊ में तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत दुपहिया वाहन चालकों को झेलनी पड़ती है। खुद को भीगने और फिसलन से बचाने के लिए कई बाइक सवार जियामऊ पुल के नीचे खड़े हो गए और बारिश थमने का इंतजार करने लगे। इसी दौरान वहां पुलिस पहुंची और मौके पर खड़े वाहनों के चालान काटने की कार्रवाई शुरू कर दी।

राहत की उम्मीद, लेकिन मिली कार्रवाई
बारिश से परेशान लोगों को जहां थोड़ी राहत की उम्मीद थी, वहीं पुलिस की कार्रवाई उनके लिए नई मुसीबत बन गई। आरोप है कि पुलिस ने हालात को समझने और लोगों को सुरक्षित निकालने के बजाय नियमों का हवाला देते हुए चालान काटने शुरू कर दिए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

वायरल वीडियो के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद लोग पुलिस के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। आमजन का कहना है कि खराब मौसम और सुरक्षा को देखते हुए पुलिस को थोड़ी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। कई लोगों का तर्क है कि बारिश में सड़क पर खड़े रहना हादसे को न्योता दे सकता है, ऐसे में पुल के नीचे रुकना मजबूरी थी।

सड़क हादसों के आंकड़े और सरकार की चिंता
राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में नवंबर तक प्रदेश में कुल 46,223 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 24,776 लोगों की मौत हो चुकी है। इन आंकड़ों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीर बताया था। उन्होंने कहा था कि एक भी सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत पूरे परिवार को जीवनभर का दर्द दे जाती है और इस पीड़ा को वही परिवार समझ सकता है।

संवेदनशीलता और सख्ती के बीच संतुलन पर बहस
मुख्यमंत्री ने पिछले दिसंबर एक कार्यक्रम में सड़क हादसों को रोकने के लिए संवेदनशीलता के साथ-साथ कठोर फैसलों की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी एक वास्तविक सड़क दुर्घटना के उदाहरण के जरिए लोगों को समझाया जाए कि छोटी सी लापरवाही किस तरह जीवन की दिशा बदल सकती है। हालांकि जियामऊ पुल की इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या बारिश में फंसे लोगों के साथ की गई पुलिस कार्रवाई उसी संवेदनशीलता की मिसाल है, जिसकी बात सरकार कर रही है।

 

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