अमेरिकी धमकियों के बीच ग्रीनलैंड में कनाडा-फ्रांस की एंट्री, ट्रंप को कूटनीतिक झटका

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नुक (ग्रीनलैंड) में बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच कनाडा और फ्रांस ने बड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर दी जा रही “अधिग्रहण” की धमकियों के बीच दोनों देशों ने ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में अपने-अपने कांसुलेट खोल दिए हैं। इसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समर्थन में एक मजबूत राजनीतिक-कूटनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यह कदम न केवल नाटो सहयोगी डेनमार्क के साथ एकजुटता दर्शाता है, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका के बढ़ते दबाव को संतुलित करने की कोशिश भी माना जा रहा है।

कनाडा ने नुक में फहराया झंडा, डेनमार्क-ग्रीनलैंड के साथ खड़े होने का ऐलान
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने शुक्रवार को नुक में कनाडाई कांसुलेट का औपचारिक उद्घाटन किया। इस दौरान ‘मैपल लीफ’ झंडा फहराया गया और “ओ कनाडा” राष्ट्रगीत गाया गया। आनंद ने कहा कि कांसुलेट खोलने का मकसद यह साफ संदेश देना है कि कनाडा ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के साथ कई अहम मुद्दों पर मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि यह कांसुलेट आर्कटिक क्षेत्र में कनाडा की मौजूदगी, साझेदारी और नेतृत्व को और मजबूत करेगा।

2024 में लिया गया था फैसला, मौसम बना देरी की वजह
कनाडा सरकार ने ग्रीनलैंड में कांसुलेट खोलने का फैसला वर्ष 2024 में ही कर लिया था। यह निर्णय ट्रंप के हालिया बयानों से पहले का है, हालांकि खराब मौसम के चलते इसका उद्घाटन अब जाकर हो सका। कनाडा लंबे समय से आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

ग्रीनलैंड में महावाणिज्य दूतावास खोलने वाला फ्रांस बना ईयू का पहला देश
इसी दिन फ्रांस ने भी ग्रीनलैंड में अपना महावाणिज्य दूतावास खोल दिया। फ्रांस की ओर से ज्यां-नोएल पोइरियर ने नुक में महावाणिज्य दूत के रूप में कार्यभार संभाला। इसके साथ ही फ्रांस ग्रीनलैंड में आधिकारिक दूतावास स्थापित करने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया है।

मैक्रों की यात्रा के बाद लिया गया फैसला, ट्रंप की मंशा पर खुली आलोचना
फ्रांस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह फैसला जून 2025 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ग्रीनलैंड यात्रा के दौरान लिया गया था। उस समय मैक्रों ने यूरोप की “एकजुटता” पर जोर देते हुए ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर दिखाई गई महत्वाकांक्षाओं की खुलकर आलोचना की थी।

ग्रीनलैंड को लेकर टैरिफ धमकियों से बढ़ा था तनाव
गौरतलब है कि पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क और सात अन्य यूरोपीय देशों—फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड्स और फिनलैंड—पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि जब तक ग्रीनलैंड को अमेरिका को “पूरी तरह बेच” नहीं दिया जाता, तब तक ये टैरिफ लागू रहेंगे।

ईयू की एकजुटता के बाद ट्रंप ने पीछे खींचे कदम
यूरोपीय संघ की एकजुट प्रतिक्रिया के बाद ट्रंप को अपनी टैरिफ धमकी वापस लेनी पड़ी। पहले उन्होंने 1 फरवरी से 10 फीसदी और 1 जून से 25 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही थी। बाद में दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि नाटो के साथ भविष्य को लेकर एक “समझौते का ढांचा” तैयार किया जा रहा है और इसमें सैन्य बल के इस्तेमाल से इनकार किया गया है।

आर्कटिक में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच बड़ा संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा और फ्रांस का यह कदम ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लिए मजबूत समर्थन का संकेत है। साथ ही यह आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक रणनीतिक प्रतिक्रिया भी है, जहां रूस और चीन भी अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहे हैं।

 

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