‘यह सरकार की विदाई वाला बजट है’… यूपी बजट पर अखिलेश यादव का हमला, बोले- बेरोजगारों और किसानों के लिए कुछ नहीं
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार के 10वें बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत ही उन्होंने एक तंज भरी पंक्ति से की—“जब मुंह खोला तब बुरा बोला।” उन्होंने बजट को “विदाई बजट” बताते हुए कहा कि अब बीजेपी की विदाई तय है। सरकार 9 लाख करोड़ रुपये के बजट को अपनी उपलब्धि बता रही है, लेकिन असल तस्वीर कुछ और है।
अखिलेश यादव ने कहा कि हर साल बजट का आकार बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन सवाल यह है कि पिछला बजट कितना खर्च हुआ। उन्होंने दावा किया कि सरकार अपने आवंटित बजट का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाई, जो उसकी नाकामी को दिखाता है।
GSDP और 3 ट्रिलियन इकॉनमी पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 2025-26 के लिए 30.25 लाख करोड़ रुपये की GSDP का अनुमान बता रही है और बजट में 36 प्रतिशत का जिक्र कर रही है, जबकि 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की बात की जा रही है। उनके मुताबिक 3 ट्रिलियन की इकॉनमी के लिए करीब 90 लाख करोड़ रुपये की GSDP चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश को 90 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए 30 प्रतिशत की ग्रोथ रेट चाहिए, जो मौजूदा हालात में संभव नहीं है।
‘बजट खर्च करने में फिसड्डी सरकार’
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार आवंटित धनराशि का समुचित उपयोग नहीं कर पा रही। उनके मुताबिक कृषि विभाग में 57 प्रतिशत, स्वास्थ्य में 58 प्रतिशत और बेसिक शिक्षा में केवल 62 प्रतिशत बजट ही खर्च हो पाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुराना बजट ही पूरी तरह खर्च नहीं हुआ तो नए और बड़े बजट से जनता को क्या लाभ होगा। उन्होंने कहा कि एमएसएमई और कृषि क्षेत्र के लिए जरूरी सहयोग भी नजर नहीं आ रहा।
निवेश और रोजगार पर सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने सरकार के 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश (MOU) के दावों पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि अगर निवेश जमीनी स्तर पर उतरा होता तो सरकार को बार-बार रोजगार देने की बात नहीं करनी पड़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में प्रदेश अन्य देशों से काफी पीछे है और सरकार राशन पाने वालों की वास्तविक आय को छिपा रही है। साथ ही यह भी कहा कि सरकार की मंशा सरकारी अस्पतालों को कमजोर कर स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने की है।
किसानों और एमएसएमई की अनदेखी का आरोप
गन्ने के दाम और किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को लेकर भी सपा प्रमुख ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि नई नीतियों और डील के बाद किसान और एमएसएमई क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। उनका आरोप था कि यूपी में रजिस्टर्ड एमएसएमई इकाइयों तक भी सरकार की पहुंच प्रभावी नहीं है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इलाज की व्यवस्थाएं पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हैं।
अखिलेश यादव ने पूरे बजट को “कागजी बजट” करार देते हुए कहा कि यह जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। उनके मुताबिक बेरोजगारी, किसानों की आय और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार का कोई ठोस रोडमैप नजर नहीं आता।
