यूपी समेत 5 चुनावी राज्यों में अक्टूबर में अपडेट होगी वोटर लिस्ट! चुनाव आयोग करा सकता है विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण

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नई दिल्ली: अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले पांच राज्यों में मतदाता सूचियों को अपडेट करने की तैयारी तेज हो सकती है। चुनाव आयोग अक्टूबर में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर की मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसएसआर कराने का आदेश दे सकता है। इसके लिए 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि माना जा सकता है। चुनाव से पहले मतदाता सूची को अद्यतन करने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया कराई जा सकती है।

इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलतियों को सुधारने और मतदाता सूची में जरूरी बदलाव करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

देशभर में एक साथ SSR कराने की संभावना कम

मौजूदा परिस्थितियों में पूरे देश में एक साथ विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने की संभावना कम बताई जा रही है। इसकी एक वजह कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का तीसरा चरण और दूसरी ओर जारी जनगणना प्रक्रिया है।

ऐसे में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव वाले राज्यों की मतदाता सूचियों को प्राथमिकता के आधार पर अपडेट किया जा सकता है। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, चुनाव वाले राज्यों में एसएसआर की प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू किए जाने की संभावना है।

SIR और SSR में क्या है अंतर?

विशेष गहन पुनरीक्षण और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। एसआईआर के दौरान मतदाता सूची की व्यापक और गहन जांच की जाती है। इसमें मतदाताओं की पात्रता और सूची में दर्ज जानकारी का विस्तृत सत्यापन किया जाता है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और गलत या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना होता है।

वहीं एसएसआर का मुख्य उद्देश्य मौजूदा मतदाता सूची को संशोधित और अद्यतन करना है। इसके तहत नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, रिकॉर्ड में मौजूद गलतियों को सुधारने और जरूरी बदलाव करने की प्रक्रिया होती है। यानी एसआईआर में व्यापक सत्यापन पर जोर रहता है, जबकि एसएसआर मौजूदा मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया है।

देशव्यापी SSR को लेकर आयोग में सामने आए अलग-अलग मत

देशभर में एसएसआर नहीं कराए जाने को लेकर चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग मत सामने आने की बात कही गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 1 जनवरी 2025 के बाद देशव्यापी एसएसआर नहीं कराए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी।

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों आयुक्तों ने पिछले कुछ महीनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े मामलों में 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची से नाम हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

हालांकि चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में लिए गए उसके सभी आदेश और फैसले सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं। एसआईआर से जुड़े फैसलों में भी आयोग के भीतर पूरी सहमति होने की बात कही गई है।

जनगणना भी देशव्यापी प्रक्रिया में बनी चुनौती

देशभर में एसएसआर कराने के मामले में जनगणना की प्रक्रिया भी एक चुनौती है। जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच निर्धारित था। वहीं लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में दूसरा चरण चल रहा है।

अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों को ध्यान में रखते हुए संबंधित कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। ऐसे में चुनावी राज्यों की मतदाता सूचियों को समय पर अपडेट करना चुनाव आयोग के लिए प्राथमिकता हो सकती है।

जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 21 के तहत होगा पुनरीक्षण

चुनावी राज्यों में प्रस्तावित एसएसआर जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 21 के तहत किया जाएगा। इस प्रावधान में प्रत्येक चुनाव या उपचुनाव से पहले संबंधित अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की व्यवस्था है।

इसी प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में अगले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट करने की तैयारी की जा सकती है।

 

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