Agriculture Budget 2026: कृषि क्षेत्र में लॉन्ग-टर्म सुधारों की जरूरत, टेक्नोलॉजी और क्लाइमेट रेजिलिएंस पर होना चाहिए फोकस

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का बजट पेश करने जा रही हैं। हर साल की तरह, इस बार भी अलग-अलग सेक्टर सरकार से उच्च उम्मीदें रखते हैं। इसी कड़ी में कृषि और उससे जुड़े सेक्टर अब सालाना योजनाओं से आगे जाकर लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल सुधारों की मांग कर रहे हैं। इन सुधारों का उद्देश्य प्रोडक्टिविटी बढ़ाना, वैल्यू चेन को मजबूत करना और किसानों की स्थिर एवं टिकाऊ आय सुनिश्चित करना है।
कैसे अनलॉक होगी कृषि क्षेत्र की पूरी क्षमता
एग्रीकल्चर इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि इस बजट में टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, क्रेडिट फ्लो, वैल्यू-एडेड प्रोडक्शन और बेहतर सप्लाई-चेन को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उनका मानना है कि बजट ऐसे आर्किटेक्चर-लेवल सुधार ला सकता है जिनका कृषि क्षेत्र लंबे समय से इंतजार कर रहा है। कृषि भारत की GDP में लगभग 18% का योगदान देती है और 45% से अधिक वर्कफोर्स को रोजगार देती है, लेकिन यह कम प्रोडक्टिविटी, पानी के असंतुलित इस्तेमाल और बिखरे हुए बाजारों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
इनपुट सब्सिडी को दोबारा डिजाइन करने की जरूरत

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इनपुट सब्सिडी को फिर से डिजाइन करना महत्वपूर्ण प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि इसका फोकस खपत पर नहीं बल्कि एफिशिएंसी पर हो। कृषि सेक्टर को वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किए गए पैकेज ऑफ प्रैक्टिस से जुड़े इंसेंटिव की जरूरत है, जो प्रोडक्शन के नतीजों से जुड़े हों। परफॉर्मेंस-बेस्ड सपोर्ट मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है, संसाधनों की एफिशिएंसी बढ़ा सकता है और किसानों की आय को मजबूत बना सकता है। मशीनों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी पूरी तरह DBT आधारित होनी चाहिए और इसे FMTTI या BIS-अप्रूव्ड उपकरणों तक सीमित रखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने कहा कि राज्यों को लास्ट-माइल इम्पैक्ट सुनिश्चित करने के लिए लाभार्थियों का चयन जारी रखना चाहिए।
