ईरान में सत्ता संतुलन बदला? IRGC का बढ़ा प्रभाव, कूटनीतिक फैसलों में दखल से लिबरल धड़ा कमजोर—रिपोर्ट में बड़ा दावा

untitled-design-2026-04-20t103512-1776662697

ईरान की सत्ता संरचना को लेकर एक अहम रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देश में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और उसने सैन्य के साथ-साथ कूटनीतिक फैसलों में भी निर्णायक दखल बनाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हालिया घटनाक्रम के बाद फैसले लेने की प्रक्रिया पर IRGC का नियंत्रण मजबूत हुआ है।

वीकेंड में बदला समीकरण, अहमद वाहिदी की भूमिका अहम
रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव के केंद्र में IRGC के कमांडर अहमद वाहिदी हैं, जिन्होंने अपने करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर नेतृत्व स्तर पर प्रभाव बढ़ाया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव चरम पर है और अमेरिका के साथ बातचीत कमजोर पड़ती दिख रही है।

लिबरल नेताओं को किनारे किए जाने का दावा
वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई अपेक्षाकृत उदार रुख वाले नेताओं को साइडलाइन किया गया है। बताया गया कि शीर्ष स्तर के फैसलों पर अब IRGC का सीधा प्रभाव है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची ने अमेरिका के साथ बातचीत के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का संकेत दिया था, लेकिन IRGC ने इस फैसले को पलटते हुए इसे बंद रखने पर जोर दिया।

सुरक्षा परिषद में भी बढ़ा प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि IRGC को मोहम्मद बाघर ज़ोलघाद्र का समर्थन मिला है, जो ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे सैन्य और रणनीतिक निर्णयों में IRGC की पकड़ और मजबूत हुई है।
हाल के घटनाक्रम में यह भी सामने आया कि नौसैनिक क्षति के बाद IRGC तेज हमलावर जहाजों पर अधिक निर्भर होता जा रहा है और क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।

कूटनीतिक टीम में मतभेद, वार्ता पर असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद भी गहराए हैं। ज़ोलघाद्र को हाल ही में वार्ता टीम में शामिल किया गया था ताकि IRGC के निर्देशों और सर्वोच्च नेतृत्व के प्रभाव को सुनिश्चित किया जा सके।
बताया गया कि उन्होंने IRGC नेतृत्व से शिकायत की कि अराघची ने “प्रतिरोध की धुरी” को लेकर नरम रुख अपनाया, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इसके बाद वार्ता टीम को तेहरान वापस बुला लिया गया, जिसे हुसैन ताइब जैसे प्रभावशाली चेहरों का समर्थन मिला।

तनाव बढ़ा, बातचीत की संभावनाएं कमजोर
विश्लेषकों का मानना है कि मुज्तबा खामेनेई और अहमद वाहिदी जैसे नेता अब प्रमुख निर्णयकर्ता के रूप में उभर रहे हैं। इससे पश्चिमी देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं और कम हो सकती हैं।
होर्मुज़ क्षेत्र में हालात तब और तनावपूर्ण हो गए जब ईरान ने वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमले शुरू किए। इस दौरान दो भारतीय जहाज भी निशाने पर आए, जिससे फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंस गए और स्थिति और जटिल हो गई।

क्षेत्र में बढ़ा सैन्य तनाव, अनिश्चितता बरकरार
इसी बीच अमेरिका द्वारा ईरानी कार्गो शिप पर कार्रवाई और उसे कब्जे में लेने की घटना ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता के इस बदलते संतुलन के चलते न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा, बल्कि किसी भी संभावित समझौते या संघर्ष-विराम की स्थिति भी अनिश्चित बनी रहेगी।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Samayik Sahara के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...

एक नज़र