ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते की दिशा में बड़ा संकेत, गाइडिंग प्रिंसिपल्स पर बनी सहमति, जेडी वेंस बोले—न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करना अमेरिका की रेड लाइन

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वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत में अहम प्रगति हुई है। दूसरे दौर की वार्ता के दौरान दोनों देशों के वार्ताकार संभावित समझौते के लिए गाइडिंग प्रिंसिपल्स यानी मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमत हो गए हैं। इस बात की जानकारी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दी है।

रास्ता शुरू हुआ, लेकिन अंतिम समझौता अभी दूर
अराघची ने बताया कि जिनेवा में हुई बातचीत में एक साझा समझ विकसित हुई है, जिसके आधार पर अब आगे मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने साफ किया कि इस सहमति का यह मतलब नहीं है कि दोनों देश जल्दी किसी अंतिम समझौते पर पहुंच जाएंगे, लेकिन यह जरूर है कि बातचीत की दिशा तय हो गई है और औपचारिक रूप से आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है।

न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करना अमेरिका की रेड लाइन
अमेरिका की ओर से रुख सख्त बना हुआ है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने को अमेरिका की रेड लाइनों में शामिल बताया है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने भी माना है कि बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन कई अहम बिंदुओं पर अभी चर्चा बाकी है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह अगले दो हफ्तों में एक विस्तृत प्रस्ताव पेश करेगा, ताकि दोनों पक्षों के बीच खुले मतभेदों को कम किया जा सके।

ट्रंप की शर्तों पर कायम अमेरिका
जेडी वेंस ने कहा कि कुछ मामलों में बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन कई मुद्दों पर यह साफ हो गया है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कुछ सख्त सीमाएं तय कर चुके हैं, जिन्हें ईरान फिलहाल स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहा।

अमेरिका चाहता है वार्ता का दायरा बढ़े
ट्रंप प्रशासन की मंशा है कि बातचीत को केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित न रखा जाए। अमेरिका चाहता है कि इसमें ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और विरोधी-शासन प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार जैसे मुद्दे भी शामिल हों। हालांकि, तेहरान इन विषयों को बातचीत से बाहर रखने पर जोर दे रहा है। अमेरिका की ओर से इस प्रक्रिया में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

सब कुछ टेबल पर, सैन्य विकल्प का भी संकेत
जेडी वेंस ने दोहराया कि अमेरिका के पास बेहद शक्तिशाली सेना है और जरूरत पड़ने पर उसके इस्तेमाल का विकल्प भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कूटनीति को प्राथमिकता देता है, लेकिन अगर बातचीत अपनी स्वाभाविक सीमा तक पहुंच जाती है, तो आगे का फैसला राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होगा।

खामेनेई की चेतावनी से बढ़ा तनाव
बातचीत के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई का बयान सामने आया है, जिसने तनाव को और बढ़ा दिया है। खामेनेई ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिका की शक्तिशाली नौसेना को इतनी जोर से जवाब दिया जा सकता है कि वह उठ न सके। उन्होंने सोशल मीडिया पर अमेरिकी युद्धपोतों को समुद्र की तलहटी में भेजने की धमकी भी दी।

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का शक्ति प्रदर्शन
इसी बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में सैन्य अभ्यास किए हैं। ईरान का दावा है कि इन अभ्यासों के दौरान उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया, जहां से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब एक-पांचवां हिस्सा गुजरता है। इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।

 

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