क्या ट्रंप ने ईरान पर हमला करने का फैसला टाल दिया? बढ़ते तनाव के बीच तेहरान को लेकर अमेरिका की रणनीति पर सस्पेंस

मध्य पूर्व एक बार फिर खतरनाक तनाव के दौर से गुजर रहा है। ईरान पर अमेरिका के संभावित सैन्य हमले की अटकलों के बीच वैश्विक चिंता बढ़ गई है। रूस ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की, तो इससे पूरे क्षेत्र में गंभीर अस्थिरता पैदा हो सकती है। रूस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है। दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका और इज़राइल को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि वह “किसी भी स्थिति” से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी आक्रामक कदम का निर्णायक जवाब दिया जाएगा।
मिडिल ईस्ट में तेजी से बढ़ता तनाव
अमेरिकी नौसैनिक बेड़े के ईरानी जलक्षेत्र की ओर बढ़ने की खबरों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव की लहर दौड़ गई है। इसी बीच तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अंतिम समय में गुप्त संपर्क की अटकलें भी तेज हो गईं। हालांकि, ईरान ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कोई संदेश भेजा था, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इसे पूरी तरह मनगढ़ंत बताते हुए “मनोवैज्ञानिक युद्ध” करार दिया और साफ कहा कि ऐसा कोई संदेश नहीं भेजा गया।
अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई के कई विकल्प
न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन फिलहाल हिंद महासागर में तैनात है और आदेश मिलने पर एक या दो दिन के भीतर कार्रवाई करने की स्थिति में है। अधिकारी के अनुसार, अमेरिका के पास ईरान पर हमला करने के अन्य विकल्प भी मौजूद हैं, जिनमें मध्य पूर्व में पहले से तैनात लड़ाकू विमान शामिल हैं। यह विमानवाहक पोत रविवार को तीन विध्वंसक पोतों के साथ इस क्षेत्र में पहुंचा है।
टोमाहॉक मिसाइलों से लैस अमेरिकी युद्धपोत
रिपोर्टों के अनुसार, इस बेड़े में शामिल युद्धपोत 1,500 से 2,500 किलोमीटर तक मार करने वाली टोमाहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं। ये मिसाइलें समुद्र से ईरान के भीतर मौजूद रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है।
ट्रंप का बयान—ईरान में स्थिति अस्थिर
समाचार वेबसाइट एक्सियोस को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ स्थिति “ठीक नहीं” है और हालात अस्थिर बने हुए हैं। उन्होंने पुष्टि की कि मध्य पूर्व में एक “विशाल नौसैनिक बेड़ा” भेजा गया है। यह बयान यूएसएस अब्राहम लिंकन के क्षेत्र में पहुंचने के कुछ घंटों बाद सामने आया, जिससे सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं और तेज हो गईं।

वेनेजुएला मॉडल का जिक्र, ईरान पर नजर
ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान के आसपास अमेरिका का नौसैनिक जमावड़ा वेनेजुएला से भी बड़ा है। उन्होंने उस सैन्य तैनाती का भी जिक्र किया, जो वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से पहले कैरिबियन में की गई थी। उस ऑपरेशन में विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड भी शामिल था, जिसे बाद में मध्य पूर्व से वापस बुला लिया गया था। ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी सीमित कर दी गई थी, जब ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक रूप से कहा था कि “मदद आ रही है।”
हमले की आशंका से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब क्षेत्रीय अधिकारियों को डर है कि अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान पर सैन्य हमला कर सकता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा हुआ, तो ईरान और उसके सहयोगी अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे पूरा मध्य पूर्व एक बड़े टकराव की चपेट में आ सकता है।
