महिला आरक्षण और परिसीमन पर लोकसभा में गरजीं डिंपल यादव, ‘मोदी की गारंटी’ से लेकर जनगणना तक सरकार को घेरा

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लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ‘मोदी की गारंटी’ का जिक्र करते हुए सरकार की पूर्व घोषणाओं पर सवाल उठाए और पूछा कि पहले किए गए वादों का क्या हुआ। डिंपल यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण बिल पारित हो चुका है, लेकिन इसके बाद जनगणना की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और तीन वर्षों में केवल घरों की गिनती तक ही काम सीमित रह गया।

परिसीमन को सत्ता में बने रहने का जरिया बताया

सदन में बोलते हुए डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए परिसीमन को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा जनगणना और आरक्षण के नाम पर लंबे समय तक भ्रम बनाए रखने की है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार गंभीर थी तो 2024 में सत्ता में वापसी के तुरंत बाद जनगणना क्यों शुरू नहीं कराई गई। उनके अनुसार, जानबूझकर जनगणना में देरी की जा रही है ताकि आरक्षण लागू करने की स्थिति न बन सके।

‘मोदी की गारंटी’ पर उठाए कई सवाल

प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में दिए गए ‘गारंटी’ वाले बयान का हवाला देते हुए डिंपल यादव ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा क्या पूरा हुआ, क्या हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार मिला, और क्या त्योहारों पर महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर देने की बात लागू हुई। इसके साथ ही उन्होंने आवारा पशुओं की समस्या और नोटबंदी के दौरान आतंकवाद खत्म करने के दावे पर भी सवाल खड़े किए।

ओबीसी और दलित महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग

महिला आरक्षण के मुद्दे पर डिंपल यादव ने ओबीसी और दलित महिलाओं के लिए अलग कोटा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को आरक्षण देते समय पिछड़े और दलित वर्ग की महिलाओं को अलग हिस्सेदारी दी थी। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि संविधान संशोधन लाया जा रहा है, तो उसमें इन वर्गों की महिलाओं के अधिकारों को स्पष्ट रूप से शामिल क्यों नहीं किया गया।

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरा

महिला सुरक्षा को लेकर भी डिंपल यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने हाथरस कांड, उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड और मणिपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में संवेदनशीलता की कमी देखने को मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष की महिला सांसद इन मुद्दों पर चुप रहती हैं, जबकि अन्य विषयों पर मुखर नजर आती हैं। इसके अलावा उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और शहीद परिवारों की अनदेखी का मुद्दा भी उठाया।

अंत में डिंपल यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार यह संशोधन केवल भ्रम पैदा करने के लिए लेकर आई है और वह जातीय जनगणना से बचने की कोशिश कर रही है।

 

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