अमेरिका-इजराइल के हमले में खामेनेई की मौत, गुरु खुमैनी के पुश्तैनी गांव में शोक का माहौल

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अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मुस्लिम समाज में गम और आक्रोश का माहौल है। खामेनेई के गुरु अयातुल्ला रूहुल्लाह मुसावी खुमैनी का पुश्तैनी नाता उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के बदोसराय स्थित किंतूर गांव से रहा है। यहां के लोग आज भी इस वंशावली और इतिहास को याद रखते हैं।

खुमैनी वंशजों की प्रतिक्रिया
खुमैनी के वंशज सैयद निहाल अहमद काजमी ने बताया कि किंतूर गांव उनके दादा सैयद अहमद मुसावी का जन्मस्थान था। मुसावी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे और 1834 में धार्मिक यात्रा के दौरान ईरान चले गए थे। तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें भारत लौटने की अनुमति नहीं दी। उनके बाद मुसावी ईरान के खुमैन शहर में बस गए, जहां उनके पौत्र रूहुल्लाह खुमैनी का जन्म हुआ। काजमी ने खामेनेई की मौत को इंसानियत पर हमला करार दिया।

गांव में शोक और प्रार्थनाएं
खामेनेई के प्रपौत्र डॉक्टर सैयद रेहान काजमी ने बताया कि उनके परदादा के शिष्य खामेनेई की मौत ने ईरान और पूरे विश्व के मुसलमानों को गहरा नुकसान पहुंचाया है। किंतूर निवासी सैयद हुसैन जैदी ने खामेनेई को इंसानियत और मुसलमानों के मार्गदर्शक बताया और अमेरिका-इजराइल के इस हमले को आतंकवादी कार्रवाई करार दिया। खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही गांव में दुआ-ए-फातिहा, शोकसभा और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाओं का आयोजन किया गया।

मुस्लिम संगठनों का आक्रोश
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अमेरिका-इजराइल के हमले में खामेनेई की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया। लखनऊ स्थित छोटा इमामबाड़ा में रविवार शाम विशाल प्रदर्शन और शोकसभा आयोजित की जाएगी। सुन्नी मस्जिदों में भी विशेष दुआ (ईसाल-ए-सवाब) और युद्ध रोकने के लिए प्रार्थनाएं की जाएंगी। ईरान की सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के खामेनेई की मौत की पुष्टि की।

 

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