AI Deepfake पर सख्ती: 20 फरवरी से लागू होंगे नए IT नियम, फर्जी फोटो-वीडियो बनाए तो हो सकती है जेल

फतेहाबाद। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते साइबर अपराध और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) नियम, 2026 लागू करने का निर्णय लिया है। ये नए नियम 20 फरवरी से प्रभावी होंगे। प्रशासन का कहना है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसी की फोटो, वीडियो या आवाज से छेड़छाड़ करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा।
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने जिलेवासियों को आगाह करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों पर फर्जी और भ्रामक सामग्री तेजी से बढ़ रही है, जिससे लोगों की प्रतिष्ठा, निजता और सुरक्षा को सीधा खतरा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिला पुलिस अगले एक सप्ताह तक विशेष जागरूकता अभियान चलाएगी और जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को नए नियमों की जानकारी देगी।
डीपफेक बनाना अब गंभीर अपराध
नए नियमों के तहत एआई की मदद से किसी व्यक्ति की फोटो, वीडियो या आवाज को इस तरह बदलना कि वह वास्तविक लगे, दंडनीय माना जाएगा। ऐसे कृत्य न केवल संबंधित व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में भ्रम और अविश्वास का माहौल भी पैदा करते हैं।
AI कंटेंट पर लेबल अनिवार्य
संशोधित नियमों के अनुसार एआई से तैयार या परिवर्तित किसी भी कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना जरूरी होगा, ताकि आम लोग पहचान सकें कि सामग्री वास्तविक है या कृत्रिम। ऑडियो कंटेंट के मामले में शुरुआत में स्पष्ट चेतावनी देना अनिवार्य किया गया है। बिना लेबल वाले या संदिग्ध कंटेंट को साझा करना भी जोखिमपूर्ण माना जाएगा और इस पर कानूनी कार्रवाई संभव है।
सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ी जिम्मेदारी
इंटरनेट मीडिया कंपनियों की जवाबदेही भी कड़ी कर दी गई है। अश्लील, आपत्तिजनक या निजता का उल्लंघन करने वाली सामग्री पर अब 24 घंटे के बजाय केवल दो घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। अन्य नियम-विरुद्ध कंटेंट हटाने की समय-सीमा तीन घंटे तय की गई है।

इन धाराओं में हो सकती है कार्रवाई
किसी व्यक्ति की गलत पहचान बनाकर धोखाधड़ी करना, बदनाम करना या भ्रम फैलाना भारतीय न्याय संहिता, 2023, पॉक्सो अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट निलंबित या बंद किया जा सकता है और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीपफेक से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां
किसी भी संदिग्ध वीडियो, फोटो या ऑडियो को बिना सत्यापन के साझा न करें।
कंटेंट पर एआई लेबल या चेतावनी अवश्य देखें।
अनजान लिंक और संदिग्ध प्रोफाइल से सतर्क रहें।
अपनी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर सीमित रखें।
फर्जी या आपत्तिजनक कंटेंट मिलने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
किसी की छवि या आवाज से छेड़छाड़ कर कंटेंट बनाना कानूनी अपराध है।
एसपी सिद्धांत जैन ने स्पष्ट किया कि 20 फरवरी से नियम लागू होते ही साइबर अपराधों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। जागरूकता अभियान के माध्यम से आमजन को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क किया जाएगा।
