महाकुंभ फेम मोनलिसा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, जन्म प्रमाण पत्र बदलने का आदेश रद्द, ‘लव जिहाद’ और अपहरण विवाद में आया फैसला

monalisa

इंदौर/महेश्वर: प्रयागराज महाकुंभ 2025 से इंटरनेट पर वायरल होकर सुर्खियों में आईं मध्य प्रदेश की मोनलिसा भोंसले के विवाह और उम्र से जुड़े विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने याचिका WP No. 18924 of 2026 पर सुनवाई करते हुए महेश्वर नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी की ओर से मोनलिसा की जन्मतिथि बदलने और उनका मूल जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के नागरिक और संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करने वाला फैसला उसे सुने बिना नहीं लिया जा सकता। अदालत ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देने पर जोर दिया है।

महाकुंभ में माला बेचते-बेचते मिली थी देशभर में पहचान

महेश्वर, खरगोन के एक घुमंतू परिवार से ताल्लुक रखने वाली मोनलिसा महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज में रुद्राक्ष और मोतियों की माला बेचते हुए सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थीं। इसके बाद वह देशभर में चर्चा में आ गईं। बाद में उन्हें एक मलयालम फिल्म में अभिनय करने का मौका भी मिला।

फिल्म के सह-कलाकार से विवाह के बाद शुरू हुआ विवाद

फिल्म की शूटिंग के दौरान मोनलिसा और उनके मुस्लिम सह-कलाकार के बीच प्रेम संबंध बने। दोनों ने 11 मार्च 2026 को केरल के त्रिवेंद्रम स्थित अरुमानूर नैनार देव मंदिर में विवाह किया। इसके बाद इस विवाह का आधिकारिक पंजीकरण पूवार ग्राम पंचायत में कराया गया।

विवाह के तुरंत बाद मोनलिसा के पिता ने महेश्वर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 137(2), 81, 83 और 87, बाल विवाह निषेध अधिनियम तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की। इस मामले को मीडिया और सोशल मीडिया पर ‘लव जिहाद’ के रूप में भी पेश किया गया।

2008 की जन्मतिथि को लेकर सामने आया असली विवाद

5 जून 2025 को महेश्वर नगर परिषद की ओर से जारी जन्म प्रमाण पत्र में मोनलिसा की जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। इस रिकॉर्ड के अनुसार वह 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की हो चुकी थीं।

विवाह के बाद उनके पिता ने महेश्वर स्वास्थ्य केंद्र के वर्ष 2009 के प्रसव रजिस्टर की एक प्रविष्टि का हवाला देते हुए दावा किया कि मोनलिसा की वास्तविक जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 है। इस दावे के आधार पर विवाह के समय उनकी उम्र 17 वर्ष होने की बात सामने आई।

बिना नोटिस जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर बदली गई जन्मतिथि

पिता की ओर से दिए गए आवेदन के बाद महेश्वर नगर निकाय के सीएमओ ने 31 मार्च 2026 को मोनलिसा का पुराना जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिया। इसके साथ ही उनकी नई जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज कर दी गई। इस कार्रवाई के खिलाफ मोनलिसा और उनके पति ने हाईकोर्ट का रुख किया।

जन्मतिथि बदलने से कई अधिकारों पर असर, हाईकोर्ट ने जताई चिंता

अदालत ने माना कि जन्मतिथि को 2008 से बदलकर 2009 करने से मोनलिसा के कई नागरिक और मौलिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इनमें संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदान का अधिकार, पैन और बैंक खाते संचालित करने की स्वतंत्रता, अनुबंध करने की क्षमता तथा अनुच्छेद 21 के तहत जीवनसाथी चुनने का व्यक्तिगत अधिकार शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी फैसले से संबंधित व्यक्ति खुद सबसे अधिक प्रभावित हो रहा हो, तो केवल उसके पिता को नोटिस या सूचना देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं माना जा सकता।

31 मार्च का आदेश रद्द, अब मोनलिसा को मिलेगा अपना पक्ष रखने का मौका

हाईकोर्ट ने महेश्वर नगर परिषद के सीएमओ की ओर से जारी 31 मार्च 2026 के आदेश संख्या 405/Na.Pa./2026 को निरस्त कर दिया। इसी आदेश के जरिए मोनलिसा का पुराना जन्म प्रमाण पत्र रद्द करके नई जन्मतिथि दर्ज की गई थी।

अदालत ने सीएमओ को निर्देश दिया है कि मोनलिसा को अपना पक्ष रखने का पूरा और प्रभावी अवसर दिया जाए। इसके बाद ही उनके पिता की ओर से दी गई अर्जियों पर कानून के मुताबिक नया फैसला लिया जाए।

 

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