ईरान के बाद यमन में भी उबाल, हजारों लोग सड़कों पर; 1990 से पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग तेज

ईरान में सरकार विरोधी माहौल के बाद अब मध्य पूर्व के देश यमन में भी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। राजधानी साना समेत दक्षिणी इलाकों में हजारों लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी 1990 से पहले के दक्षिण यमन राज्य की बहाली की मांग कर रहे हैं। दक्षिणी शहर अदन इस आंदोलन का केंद्र बन गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग पुराने दक्षिण यमन का झंडा लहराते हुए स्वतंत्रता के नारे लगा रहे हैं।
दक्षिणी यमन की बहाली को लेकर उग्र हुआ आंदोलन
मध्य पूर्व के इस संवेदनशील क्षेत्र में खासतौर पर अदन में लाखों लोग 1990 से पहले की राजनीतिक व्यवस्था की वापसी की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एकीकरण के बाद से दक्षिणी क्षेत्रों के साथ उपेक्षा हुई है। आंदोलनकारियों की यह मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सऊदी समर्थित सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
France 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंदोलन सरकार और दक्षिणी गुटों के बीच गहरी खाई पैदा कर रहा है। स्वतंत्रता की इस मुहिम का नेतृत्व Southern Transitional Council (STC) कर रहा है, जो जमीनी स्तर पर कई कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है।
गैस संकट, चरमराती अर्थव्यवस्था और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था
यह विरोध ऐसे समय में भड़का है जब देश गंभीर गैस संकट से जूझ रहा है। ईंधन की कमी से रसोई और परिवहन व्यवस्था प्रभावित है। अर्थव्यवस्था लगभग ठप है और स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों में दवाइयों की कमी है और बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हो चुकी हैं।
STC का गठन साल 2017 में संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन से हुआ था। अब यह संगठन दक्षिणी यमन को अलग राष्ट्र बनाने की मांग पर अड़ा है। हालांकि जमीनी हालात और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन इस लक्ष्य को जटिल बना रहे हैं।
1990 के एकीकरण के बाद बढ़ी असंतुष्टि

साल 1990 में उत्तर और दक्षिण यमन के एकीकरण के बाद से दक्षिणी आबादी खुद को राजनीतिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर महसूस करती रही है। उत्तर में हूती विद्रोहियों के साथ जारी संघर्ष, सऊदी-यूएई गठबंधन का हस्तक्षेप और लगातार गहराता आर्थिक संकट हालात को और पेचीदा बना चुके हैं।
साल 2025-2026 के दौरान STC ने दक्षिणी इलाकों पर कब्जा मजबूत करने की कोशिश की थी। लेकिन जनवरी 2026 में सऊदी समर्थित सरकारी बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अदन समेत कई क्षेत्रों पर दोबारा नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद STC के नेता एडरूस अल-जुबैदी संयुक्त अरब अमीरात चले गए और काउंसिल ने खुद को भंग करने की घोषणा कर दी। इसके बावजूद सड़कों पर विरोध की आवाज थमी नहीं है।
हिंसक झड़पें, एक की मौत और कई घायल
कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक भी हुए। झड़पों में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता ने पहले ही लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया है। ऐसे में बढ़ता जनाक्रोश देश को और अस्थिर कर सकता है।
STC समर्थकों का दावा है कि स्वतंत्र दक्षिण यमन से विकास और स्थिरता का नया रास्ता खुलेगा। हालांकि सऊदी अरब और यूएई के बीच क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा, साथ ही हूती विद्रोहियों का खतरा, इस लक्ष्य को फिलहाल दूर की कौड़ी बना रहा है। मौजूदा आंदोलन ने यमन के भविष्य को दो धाराओं में बांट दिया है—एक तरफ राष्ट्रीय एकीकरण की कोशिशें और दूसरी तरफ दक्षिणी पहचान और स्वतंत्रता की मांग।
