खरीफ सीजन में किसानों को बड़ी राहत! यूरिया-DAP से लदे 15 जहाज भारत पहुंचे, खाद आपूर्ति को लेकर सरकार ने दिया भरोसा
नई दिल्ली: खरीफ सीजन के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण प्रभावित हुई उर्वरक आपूर्ति अब पटरी पर लौटती दिख रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने के बाद यूरिया, डीएपी और सल्फर से लदे 15 जहाज सुरक्षित रूप से भारतीय बंदरगाहों की ओर पहुंच रहे हैं। इससे देश में खाद की उपलब्धता बेहतर होने और किसानों को समय पर उर्वरक मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
केंद्र सरकार के अनुसार, जिन जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई थी, वे अब सुरक्षित रूप से आगे बढ़ चुके हैं। इन जहाजों में यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर जैसी महत्वपूर्ण उर्वरक सामग्री मौजूद है, जो खरीफ फसलों की बुआई के दौरान किसानों के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।
खरीफ सीजन की जरूरत का आधे से ज्यादा स्टॉक पहले से उपलब्ध
सरकार ने बताया कि खरीफ मौसम के लिए अनुमानित 38.39 मिलियन टन उर्वरक आवश्यकता के मुकाबले लगभग 19.76 मिलियन टन खाद की व्यवस्था पहले ही कर ली गई है। यह कुल अनुमानित मांग का 51 प्रतिशत से अधिक है। पिछले वर्ष इसी अवधि में उपलब्ध स्टॉक मांग के करीब 33 प्रतिशत के बराबर था।
अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त भंडारण और समय रहते की गई तैयारियों की वजह से किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कई देशों से किया गया आयात
उर्वरक आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए भारत ने विभिन्न देशों से आयात व्यवस्था मजबूत की है। यूरिया की आपूर्ति ओमान, मलेशिया, वियतनाम, नाइजीरिया, रूस, मिस्र और अल्जीरिया जैसे देशों से की गई है। वहीं डीएपी और एनपीके उर्वरकों के लिए रूस, मोरक्को, जॉर्डन, सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक मार्गों के जरिए आपूर्ति सुनिश्चित की गई।
पश्चिम एशिया तनाव के बाद बढ़ी थी चिंता
पश्चिम एशिया में संघर्ष और समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही बाधित होने से कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि हालात सामान्य होने के बाद समुद्री यातायात फिर से बहाल हो रहा है, जिससे भारत को भी राहत मिली है।
घरेलू यूरिया उत्पादन भी हुआ सामान्य
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि उर्वरक कारखानों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अब पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। संकट के दौरान उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई थी, लेकिन अब सभी घरेलू यूरिया संयंत्र अपनी पूर्ण क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में खाद की उपलब्धता और मजबूत होने की संभावना है।
