पाकिस्तान में किसानों का उग्र विरोध, 100 से ज्यादा शहरों में सड़कों पर उतरे; MSP और नीतियों को लेकर सरकार घिरी

इस्लामाबाद: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में अब किसानों का गुस्सा भी खुलकर सामने आ गया है। शुक्रवार को ‘अंतरराष्ट्रीय किसान संघर्ष दिवस’ के मौके पर देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। पाकिस्तान किसान राबिता कमेटी (PKRC) के आह्वान पर आयोजित इन प्रदर्शनों में 100 से ज्यादा शहरों में किसान सड़कों पर उतर आए और सरकार की कृषि नीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई।
MSP बढ़ाने की मांग, आजीविका पर खतरे का आरोप
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सरकार से गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन तय करने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा नीतियों के कारण उनकी आजीविका पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और बढ़ती लागत के बीच उन्हें उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
कॉरपोरेट खेती के खिलाफ खुला मोर्चा
किसानों ने कॉरपोरेट खेती के मॉडल को सिरे से खारिज करते हुए बटाई पर खेती करने वाले किसानों को जारी बेदखली नोटिस वापस लेने की मांग भी उठाई। इसके अलावा, गेहूं की खरीद को निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की योजना का भी विरोध किया गया। किसानों का आरोप है कि इससे छोटे और सीमांत किसानों को बड़ा नुकसान होगा और उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।
देशभर में प्रदर्शन, कई बड़े शहर प्रभावित
पंजाब प्रांत के लाहौर, मुल्तान, बहावलपुर, साहीवाल और सरगोधा में बड़े स्तर पर प्रदर्शन देखने को मिले। वहीं सिंध के हैदराबाद, सुक्कुर, लरकाना और ठट्टा में भी किसानों ने रैलियां निकालीं। खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर, स्वात, एबटाबाद और बन्नू के साथ-साथ बलूचिस्तान के क्वेटा, मस्तुंग और कलात में भी विरोध प्रदर्शन हुए। इस तरह पूरे देश में किसानों का असंतोष खुलकर सामने आया।

सरकार पर दो साल में हालात बिगाड़ने का आरोप
लाहौर में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए PKRC की महासचिव रिफ्फत मकसूद ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल किसानों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हुए हैं। उनका आरोप है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी कर रही है और छोटे किसानों के बजाय कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है।
चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो तेज होगा आंदोलन
किसान संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन और उग्र हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के किसान पहले से ही बढ़ती लागत, फसलों के अस्थिर दाम और जलवायु संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में यह विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बनकर उभरा है।
