नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड आदित्य आनंद गिरफ्तार, तमिलनाडु से दबोचा गया; भेष बदलकर फरार हुआ था आरोपी

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नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन के मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। करीब 2,400 किलोमीटर दूर तमिलनाडु से उसकी गिरफ्तारी हुई। गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि एसटीएफ और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीम लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थी।

भेष बदलकर फरार, आखिरकार गिरफ्त में आया आरोपी

पुलिस के मुताबिक, नोएडा हिंसा के बाद आदित्य आनंद ने अपनी पहचान छिपाने के लिए दाढ़ी और बाल कटवा लिए थे और भेष बदलकर तमिलनाडु भाग गया था। लगातार छापेमारी और तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस ने उसे ट्रैक कर गिरफ्तार कर लिया।

पहले से रच रहा था साजिश, कई जगहों पर सक्रिय रहा

जांच में सामने आया है कि आदित्य आनंद ने पहले से गिरफ्तार किए जा चुके रूपेश राय, श्रृष्टि, मनीषा और आकृति के साथ मिलकर हिंसा की साजिश रची थी। बताया जा रहा है कि वह मजदूर संगठनों को उकसाने और विरोध को हिंसक रूप देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। पुलिस के अनुसार, आदित्य 2020 से और उसका साथी रूपेश 2018 से देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय रहे हैं और जहां भी कोई आंदोलन होता था, वहां उनकी मौजूदगी देखी जाती थी।

पुलिस जांच में साजिश के अहम खुलासे

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने पहले ही इस मामले को सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण गतिविधि बताया था। उनके मुताबिक, आदित्य आनंद, मनीषा चौहान और रूपेश राय ने मिलकर मजदूरों को भड़काने की रणनीति बनाई। खुद को सामान्य पेशे से जुड़ा बताकर ये लोग भीड़ के बीच आसानी से घुल-मिल जाते थे और आंदोलन को दिशा देते थे।

हिंसा की पूरी टाइमलाइन आई सामने

जांच के अनुसार, 31 मार्च और 1 अप्रैल को आदित्य और रूपेश का मूवमेंट नोएडा में दर्ज किया गया। इसके बाद 9 और 10 अप्रैल को क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए, जिनके माध्यम से लोगों को जोड़ा गया। 10 अप्रैल को मजदूरों ने विरोध शुरू किया और 11 अप्रैल को उन्हें सड़क जाम करने के लिए उकसाया गया। उसी दिन समझौता होने के बावजूद आरोपियों ने भड़काऊ भाषण देकर स्थिति को फिर से तनावपूर्ण बना दिया।

सोशल मीडिया के जरिए भड़काई गई हिंसा

पुलिस के मुताबिक, 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के सामने मजदूरों को इकट्ठा होने के लिए उकसाया गया। जब प्रशासन ने स्थिति संभालने की कोशिश की, उसी दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ हैंडल्स के जरिए फर्जी खबरें फैलाई गईं। जांच में पाया गया कि प्रदर्शन के दौरान कई लोग इन पोस्ट्स को देख रहे थे, जिसके बाद माहौल बिगड़ा और हिंसा भड़क उठी।

 

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