KGMU धर्मांतरण मामले में 13 डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी, कुलपति की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय समिति गठित
कार्य परिषद की बैठक में STF रिपोर्ट पर चर्चा
बैठक में कुलसचिव ने सात पेज की रिपोर्ट कार्य परिषद के सामने रखी। इसमें दर्ज तथ्यों को सदस्यों के सामने बिंदुवार प्रस्तुत किया गया। बैठक का मुख्य एजेंडा शासन की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को भेजी गई STF की जांच रिपोर्ट पर विचार करना था।
इस दौरान मामले से जुड़े KGMU के शिक्षकों और कर्मचारियों की ओर से दिए गए प्रत्यावेदनों पर भी चर्चा हुई। संबंधित पक्षों की बात सुनी गई और कार्य परिषद के सदस्यों ने अपने सुझाव रखे। तय किया गया कि इन प्रत्यावेदनों को संबंधित विभागीय समितियों के सामने भी रखा जाएगा, जहां उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर उनकी जांच होगी।
कुलपति और कुलसचिव समेत छह सदस्य होंगे शामिल
अनुशासनात्मक समिति का गठन KGMU एक्ट और विश्वविद्यालय की परिनियमावली के प्रावधानों के तहत किया जाएगा। इसमें कुलपति और कुलसचिव के अलावा चार अन्य सदस्य शामिल होंगे।
इन चार सदस्यों में दो को विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों में से नामित किया जाएगा, जबकि दो स्वतंत्र सदस्य होंगे। स्वतंत्र सदस्यों के लिए वरिष्ठ पदों से सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
STF रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की होगी जांच
समिति STF की पूरी जांच रिपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेगी। इसके साथ ही आरोपों का सामना कर रहे शिक्षकों और कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी संस्तुति कार्य परिषद को देगी। इसके आधार पर विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार आगे का निर्णय करेगा।
फिलहाल 13 डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का स्वरूप तय नहीं हुआ है। समिति की जांच और संस्तुतियों के बाद ही संबंधित लोगों के विरुद्ध संभावित अनुशासनात्मक कदम स्पष्ट होंगे।
मौलानाओं और महिला डॉक्टरों की भूमिका को लेकर भी आरोप
मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि धर्मांतरण की कथित गतिविधियों में कुछ मुस्लिम मेडिकल छात्राओं और महिला डॉक्टरों को मध्यस्थ के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। सूत्रों के मुताबिक, मौलानाओं के संपर्क में रहने वाले कुछ लोगों को कथित तौर पर हिंदू महिला डॉक्टरों को रिश्तों के जरिए अपने करीब लाने के लिए तैयार किया जाता था।
यह भी दावा किया गया है कि टीजी हॉस्टल में मौलानाओं के आने के दौरान मुस्लिम डॉक्टरों के साथ महिलाओं को भी बुलाया जाता था और उन्हें इस भूमिका के लिए प्रशिक्षण दिया जाता था। हालांकि, इन दावों की पुष्टि और संबंधित लोगों की भूमिका का निर्धारण जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
