मोबाइल-टीवी की लत छीन रही है बच्चों का बचपन, स्क्रीन टाइम से मानसिक और शारीरिक विकास पर लग रहा ब्रेक

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मोबाइल फोन और टीवी बच्चों की दिनचर्या का ऐसा हिस्सा बनते जा रहे हैं कि उनका असली बचपन धीरे-धीरे पीछे छूटता जा रहा है। अब बच्चे बाहर खेलकूद करने के बजाय खाली समय में स्क्रीन के सामने ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। इसका सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई बच्चे माता-पिता को भी समय नहीं दे पा रहे हैं और जब उनसे मोबाइल छीना जाता है, तो गुस्सा, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव जैसे लक्षण सामने आने लगते हैं। कई मामलों में माता-पिता को बच्चों का इलाज तक कराना पड़ रहा है।

स्क्रीन टाइम कैसे बिगाड़ रहा है बच्चों का संतुलन
न्यूरो केयर सेंटर की संचालक डॉ. जोली जैन गुप्ता बताती हैं कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई माता-पिता बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। ऐसे में वे बच्चों को मोबाइल या टीवी के सामने बैठा देते हैं, ताकि वे व्यस्त रहें। लेकिन लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों का मानसिक और शारीरिक संतुलन बिगड़ने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि बच्चों का बचपन उनसे छिन जाता है और उनका विकास एक स्तर पर आकर रुक जाता है।

0 से 2 साल के बच्चों के लिए मोबाइल पूरी तरह नुकसानदेह
डॉ. जोली जैन गुप्ता के मुताबिक, 0 से 2 साल की उम्र के बच्चों को पूरी तरह मोबाइल से दूर रखना चाहिए। इस उम्र में न तो उन्हें फोन पकड़ने देना चाहिए और न ही वीडियो कॉल पर बात करवानी चाहिए। 2 साल से ऊपर के बच्चों के लिए भी मोबाइल और टीवी का स्क्रीन टाइम बेहद सीमित या लगभग न के बराबर होना चाहिए। कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों के दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है और यही वजह है कि ऐसे कई बच्चों को इलाज के लिए न्यूरो केयर सेंटर लाया जाता है।

इलाज के दौरान कराई जाती हैं ये गतिविधियां
न्यूरो केयर सेंटर में स्क्रीन टाइम की लत से जूझ रहे बच्चों के लिए अलग-अलग तरह की थैरेपी कराई जाती है। इसमें वॉइस और स्पीच से जुड़ी एक्सरसाइज, फिजिकल एक्टिविटी और रंगों की पहचान से जुड़ी गतिविधियां शामिल होती हैं। इसके अलावा बच्चों को ग्रुप थैरेपी के जरिए सामाजिक व्यवहार सिखाने पर भी जोर दिया जाता है।

बच्चों को फोन देने के लिए तय करें सख्त नियम
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे बेहतर यही है कि बच्चों को मोबाइल न दिया जाए। अगर किसी जरूरी काम या पढ़ाई के लिए देना भी पड़े, तो उसका समय पहले से तय होना चाहिए। पढ़ाई के लिए भी दिन में 15 मिनट से ज्यादा फोन न दिया जाए। गेम्स, वीडियो या रील देखने के लिए बच्चों को मोबाइल देना उनकी आदत और सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

 

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