हेडफोन का ओवरयूज़ पड़ सकता है भारी! एक्सपर्ट की चेतावनी—हो सकता है स्थायी Hearing Loss, टिनिटस और इंफेक्शन का खतरा

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मोबाइल, लैपटॉप और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ हेडफोन और ईयरफोन अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। गाने सुनना, वेब सीरीज देखना या लंबी ऑफिस कॉल—अधिकतर लोग घंटों तक हेडफोन लगाए रहते हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि तेज आवाज़ और लंबे समय तक हेडफोन का इस्तेमाल कानों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। मेडफर्स्ट ईएनटी सेंटर में कंसल्टेंट डॉ. (मेजर) राजेश भारद्वाज के मुताबिक, लापरवाही भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।

सुनने की क्षमता पर पड़ सकता है स्थायी असर

लगातार और तेज वॉल्यूम में ऑडियो सुनने से कान के भीतर मौजूद संवेदनशील हेयर सेल्स को नुकसान पहुंचता है। ये सेल्स दोबारा विकसित नहीं होतीं, इसलिए एक बार क्षतिग्रस्त होने पर स्थायी हियरिंग लॉस का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में टिनिटस की समस्या भी देखी जाती है, जिसमें कानों में लगातार सीटी या घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देती रहती है।

कान में संक्रमण का बढ़ता जोखिम

ईयरबड्स या हेडफोन को लंबे समय तक पहनने और उनकी साफ-सफाई न रखने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अगर इन्हें साझा किया जाए तो बैक्टीरिया तेजी से फैल सकते हैं। लंबे समय तक कान बंद रहने से नमी जमा होती है, जिससे खुजली, सूजन और दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है प्रभाव

तेज आवाज़ में लगातार कंटेंट सुनने से मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार इससे सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और नींद से जुड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं। ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

कानों को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं 60-60 नियम

विशेषज्ञ 60-60 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। यानी अधिकतम वॉल्यूम के 60 प्रतिशत से ज्यादा आवाज़ पर न सुनें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा हेडफोन का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा नॉइज़ कैंसिलेशन फीचर वाले हेडफोन का उपयोग करें ताकि बाहरी शोर की वजह से वॉल्यूम बढ़ाने की जरूरत न पड़े। नियमित ब्रेक लेना और समय-समय पर कानों की जांच कराना भी बेहद जरूरी है।

 

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