जेल से बाहर आते ही पप्पू यादव का बड़ा आरोप: ‘मुझे मरवाने की कोशिश हुई, गिरफ्तारी साजिश थी’

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बिहार के पूर्णिया सीट से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव शुक्रवार को बेऊर जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर आते ही उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को साजिश बताया और दावा किया कि उन्हें जान से मरवाने की भी कोशिश हुई। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता प्रशासन ने ऐसा क्यों किया… सरकार में एक-दो लोग हैं जिन्होंने बदमाशी की है… एक दिल्ली के नेता, एक बिहार के नेता और एक पूर्णिया के नेता की साजिश थी।”

पुराने मामलों में मिली जमानत
सांसद को 31 साल पुराने जालसाजी केस में स्पेशल कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। इसके बाद गिरफ्तारी के दौरान हंगामा करने और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में भी उन्हें राहत मिल गई। साथ ही पटना और पूर्णिया में सड़क प्रदर्शन से जुड़े दो पुराने मामलों में भी उन्हें जमानत मिली है।

क्या है 1995 वाला मामला?
दरअसल 1995 में भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (दस्तावेज़ों की जालसाजी) के तहत उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि जिस मकान में वह किराए पर रहते थे, उसमें उन्होंने पार्टी ऑफिस खोल लिया था। मकान मालिक की शिकायत पर केस दर्ज हुआ और बताया जाता है कि इस मामले में कोर्ट लंबे समय से उनके खिलाफ वारंट जारी कर रहा था।

गिरफ्तारी से पहले क्या कहा था?
गिरफ्तारी से पहले पप्पू यादव ने बयान दिया था कि वह संसद सत्र से लौटे हैं और अदालत के समन की जानकारी है, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में आकर दुर्व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार की आलोचना करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने भी की थी आलोचना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी उनकी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया था।

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई का ऐलान
रिहाई के बाद सांसद ने कहा कि वह मामले को लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे और न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें जनता का साथ मिला है और वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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