पिंक सॉल्ट का ट्रेंड बना खतरा? बच्चों में बढ़ रहे थायरॉइड के मामले, डॉक्टर ने दी आयोडीन की कमी पर चेतावनी

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इन दिनों साधारण आयोडीन युक्त नमक की जगह पिंक सॉल्ट, हिमालयन सॉल्ट और सेंधा नमक का चलन तेजी से बढ़ा है। मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे मिनरल्स की मौजूदगी के दावे के साथ इसे ज्यादा हेल्दी बताया जा रहा है। लेकिन बेंगलुरु के बाल रोग विशेषज्ञ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. तेजस्वी शेषाद्री ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बिना आयोडीन वाले नमक का सेवन बच्चों में थायरॉइड और घेंघा जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ा सकता है।

2 साल तक गुलाबी नमक खाने से बढ़ी थायरॉइड ग्रंथि

डॉ. शेषाद्री ने एक वीडियो संदेश में बताया कि उनके पास एक बच्चा आया, जिसकी थायरॉइड ग्रंथि का आकार असामान्य रूप से बढ़ा हुआ था। जांच में थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम मिला, जबकि थायरॉइड एंटीबॉडी की रिपोर्ट नेगेटिव थी। जब परिवार की खानपान की आदतों के बारे में पूछा गया तो पता चला कि बच्चा पिछले दो वर्षों से नियमित रूप से गुलाबी नमक का सेवन कर रहा था। डॉक्टर के मुताबिक, यह आयोडीन की कमी से जुड़ा मामला था।

क्या सच में हेल्दी है पिंक सॉल्ट?

गुलाबी नमक को अक्सर ‘नेचुरल’ और माइक्रो मिनरल्स से भरपूर बताकर प्रचारित किया जाता है। कई लोग यह मानते हैं कि इसमें सोडियम कम होता है और यह दिल के लिए बेहतर है। विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा गलत है। पिंक सॉल्ट में सोडियम की मात्रा सामान्य नमक के बराबर ही होती है और इसमें पर्याप्त आयोडीन नहीं होता।

20वीं सदी की शुरुआत में घेंघा रोग की व्यापक समस्या को खत्म करने के लिए खाने के नमक में आयोडीन मिलाना अनिवार्य किया गया था। आयोडीन थायरॉइड हार्मोन के निर्माण के लिए बेहद जरूरी तत्व है।

आयोडीन की कमी के लक्षण क्या हैं?

डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक बिना आयोडीन वाले नमक का सेवन करने से हाइपोथायरायडिज्म, अत्यधिक थकान, लो एनर्जी, बालों का झड़ना, थायरॉइड ग्रंथि में सूजन (घेंघा) और बच्चों में विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आयोडीन की कमी विशेष रूप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक जोखिमपूर्ण मानी जाती है।

पिंक सॉल्ट बनाम आयोडीन युक्त नमक: क्या चुनें?

गुलाबी नमक सामान्य नमक ही होता है, जिसमें आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे सूक्ष्म खनिजों की वजह से गुलाबी रंग दिखाई देता है। हालांकि इसमें आयोडीन की मात्रा नगण्य होती है। इसके विपरीत आयोडीन युक्त नमक थायरॉइड हार्मोन के संतुलन के लिए जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि ट्रेंड के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर नमक का चयन करें। खासकर बच्चों के लिए आयोडीन युक्त नमक का नियमित और संतुलित सेवन जरूरी है, ताकि थायरॉइड संबंधी बीमारियों से बचाव हो सके।

 

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