रेलवे की नई गाइडलाइन लागू, चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म पर टिकट चेकिंग में नहीं रहेंगे RPF जवान; जानिए वजह

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गोरखपुर: रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टिकट चेकिंग अभियान को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब चलती ट्रेनों और प्लेटफॉर्म पर चलने वाले टिकट जांच अभियानों में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान शामिल नहीं होंगे। यह फैसला भीड़, भगदड़ और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के उद्देश्य से लिया गया है।

चलती ट्रेनों और प्लेटफॉर्म पर नहीं होगी आरपीएफ की तैनाती

नई गाइडलाइन के अनुसार, चलती ट्रेनों और प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का पीछा करते हुए चलाए जाने वाले टिकट चेकिंग अभियान में आरपीएफ जवानों की तैनाती नहीं की जाएगी। हालांकि, स्टेशन पर रुकी ट्रेनों में किए जाने वाले ‘एंबुश चेक’ और ‘फोर्ट्रेस चेक’ के दौरान जरूरत पड़ने पर आरपीएफ की सहायता ली जा सकेगी।

वाराणसी मंडल ने जारी किए स्पष्ट निर्देश

वाराणसी मंडल के सहायक वाणिज्य प्रबंधक ने सभी मुख्य टिकट निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि टिकट जांच के दौरान निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए। साथ ही आरपीएफ के साथ समन्वय बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि रेल संचालन और यात्रियों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।

त्योहारी भीड़ और सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला

14 जुलाई को जारी पत्र में इंडियन रेलवे कमर्शियल मैनुअल का हवाला देते हुए कहा गया है कि त्योहारी सीजन में भीड़ बढ़ने और आतंकवाद विरोधी ड्यूटी तथा कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों के कारण आरपीएफ की उपलब्धता सीमित हो सकती है। ऐसे समय में बड़े पैमाने पर टिकट चेकिंग अभियान चलाने से यथासंभव बचने के निर्देश दिए गए हैं।

बिना टिकट यात्रा की जांच की जिम्मेदारी टिकट जांच स्टाफ की

रेलवे अधिनियम की धारा 137 के तहत बिना टिकट यात्रा के मामलों में धोखाधड़ी की मंशा का आकलन करना और यात्रियों के टिकट की जांच कर अतिरिक्त शुल्क वसूलना केवल टिकट जांच स्टाफ की जिम्मेदारी है। यह अधिकार आरपीएफ को स्वतंत्र रूप से प्राप्त नहीं है।

किन परिस्थितियों में कार्रवाई करेगी आरपीएफ?

गाइडलाइन के अनुसार, सहायक उप निरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक के आरपीएफ अधिकारी रेलवे अधिनियम की धारा 137 और 138 के तहत आरोपित व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकते हैं और धारा 180ए के तहत पूछताछ भी कर सकते हैं। हालांकि, यह कार्रवाई तभी होगी जब टिकट जांच स्टाफ उचित कारणों के साथ संबंधित व्यक्ति को आरपीएफ के सुपुर्द करेगा। आरपीएफ वाणिज्य विभाग को सहयोग दे सकती है, लेकिन स्वतंत्र रूप से टिकट जांच अभियान नहीं चलाएगी।

 

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