West Bengal Election 2026: क्या बालिगंज सीट पर छठी बार जीत दर्ज करेगी टीएमसी? जानिए इस हाई-प्रोफाइल सीट का पूरा सियासी गणित

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। कोलकाता की अहम विधानसभा सीटों में शामिल बालिगंज पर एक बार फिर सभी दलों की नजरें टिकी हैं। यह सीट कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और लंबे समय से राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाती रही है।

बालिगंज विधानसभा सीट का गठन 1951 में हुआ था और यहां पहला चुनाव 1952 में कराया गया था। तब से अब तक इस सीट पर 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जबकि 1992 और 2022 में दो उपचुनाव भी हुए। इस विधानसभा क्षेत्र में कोलकाता नगर निगम के सात वार्ड शामिल हैं, जिनमें वार्ड नंबर 60, 61, 64, 65, 68, 69 और 85 आते हैं।

वामपंथ का रहा लंबा दबदबा

बालिगंज सीट पर लंबे समय तक वामपंथी दलों का प्रभाव रहा है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने यहां कुल नौ बार जीत दर्ज की है। इनमें 1977 से 2001 के बीच लगातार सात चुनावों में मिली जीत भी शामिल है।

कांग्रेस पार्टी इस सीट से तीन बार चुनाव जीत चुकी है। इसके अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी यहां से एक-एक बार जीत हासिल की है।

2006 के बाद टीएमसी का लगातार कब्जा

साल 2006 के बाद से इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा बना हुआ है। पार्टी ने तब से लेकर अब तक लगातार पांच बार जीत हासिल की है, जिसमें 2022 का उपचुनाव भी शामिल है।

2011 से 2021 के बीच इस सीट का प्रतिनिधित्व सुब्रत मुखर्जी ने किया। उन्होंने 2011 में सीपीआई (एम) के फौद हलीम को 41,185 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2016 में उन्होंने कांग्रेस के कृष्णा देबनाथ को 15,225 वोटों से हराया। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के लोकनाथ चटर्जी को 75,359 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया।

2022 उपचुनाव में बाबुल सुप्रियो की जीत

सुब्रत मुखर्जी के निधन के बाद 2022 में यहां उपचुनाव हुआ था। इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और मौजूदा कैबिनेट मंत्री बाबुल सुप्रियो ने जीत दर्ज की। उन्होंने सीपीआई (एम) की सायरा शाह हलीम को 20,228 वोटों से हराया था।

तृणमूल कांग्रेस ने बालिगंज सीट पर पहली बार 2006 में जीत हासिल की थी। उस चुनाव में जावेद अहमद खान ने सीपीआई (एम) के तत्कालीन विधायक राबिन देब को 6,451 वोटों से हराया था। दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम बहुल सीट होने के बावजूद अब तक यहां से जावेद अहमद खान ही एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार रहे हैं, जिन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की। बाद में 2011 में कस्बा सीट आरक्षित होने के बाद वे वहां चले गए।

वोटर संख्या और सामाजिक समीकरण

बालिगंज विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। साल 2024 में यहां कुल 2,53,070 पंजीकृत मतदाता थे, जबकि 2021 में यह संख्या 2,47,662 और 2019 में 2,40,645 थी।

इस सीट पर मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 50.80 प्रतिशत है। वहीं अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या करीब 3.50 प्रतिशत है।

मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव

पिछले चुनावों में मतदान प्रतिशत में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2011 में यहां 66.15 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2016 में यह घटकर 63.86 प्रतिशत रह गया। 2019 में मतदान बढ़कर 66.95 प्रतिशत तक पहुंच गया, लेकिन 2021 में फिर गिरकर 60.99 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2024 में यहां 62.70 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या तृणमूल कांग्रेस इस सीट पर अपना लगातार छठा विजय अभियान जारी रख पाएगी या विपक्ष यहां समीकरण बदलने में सफल होगा।

 

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