जयशंकर की कॉमनवेल्थ देशों से बड़ी अपील, सुरक्षित सप्लाई चेन और नए कनेक्टिविटी कॉरिडोर बनाने पर दिया जोर

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नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कॉमनवेल्थ देशों के साझेदारों से आपूर्ति श्रृंखला को जोखिम से सुरक्षित बनाने और उसमें विविधता लाने के लिए मिलकर काम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इसके लिए छोटी और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के साथ-साथ अधिक कनेक्टिविटी कॉरिडोर बनाने की जरूरत है। इससे न केवल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर सामान के वितरण की व्यवस्था भी मजबूत होगी।

कॉमनवेल्थ बैठक में कारोबार और आपूर्ति व्यवस्था पर चर्चा

जयशंकर ने ये बातें कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग (सीएचओजीएम)-2026 के दौरान आयोजित राष्ट्रमंडल देशों के शासन प्रमुखों और कारोबारी नेताओं की नाश्ते पर हुई बैठक में कहीं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सदस्य देशों को आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिम कम करने और उसके विकल्प बढ़ाने के लिए साझा प्रयास करने चाहिए।

विदेश मंत्री के मुताबिक, अधिक कनेक्टिविटी कॉरिडोर व्यापार के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है, ताकि आपूर्ति प्रणाली अधिक प्रभावी बन सके।

प्रशिक्षण और डिजिटल तकनीक को बताया अहम

जयशंकर ने प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे साझेदार देशों को अधिक विकल्प मिलेंगे। दुनियाभर में फैले भारतीय कारोबारी समुदाय को कॉमनवेल्थ की एक बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने डिजिटल तकनीक को बदलाव लाने वाला माध्यम करार दिया।

उनके अनुसार, डिजिटल व्यवस्था से कामकाज में दक्षता बढ़ाने, सुशासन सुनिश्चित करने और विकास को गति देने में मदद मिल सकती है।

जलवायु कार्रवाई और आपदा प्रबंधन में सहयोग पर जोर

विदेश मंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के गठबंधन जैसे मंचों का उपयोग करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के आपातकालीन सहायता और एचएआरडी गतिविधियों से स्थानीय केंद्र विकसित करने की जरूरत सामने आती है।

जयशंकर ने कौशल की आवाजाही को भी कॉमनवेल्थ देशों की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ने से व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे विकास और समृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है।

डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और मुक्त व्यापार समझौतों का भी जिक्र

इससे पहले बुधवार को जयशंकर ने कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट के कार्यकारी सत्र को भी संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने सुशासन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की अहमियत बताई। उन्होंने भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और इस दिशा में विभिन्न देशों के साथ चल रही बातचीत की जानकारी भी साझा की।

 

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